नर्मदा जयंती मेले की चकाचौंध के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। चीचली थाना क्षेत्र के सीतारेवा नदी तट पर स्थित एक नाश्ते की दुकान से शुरू हुआ मामूली सा विवाद देखते-ही-देखते कथित तौर पर थाने के भीतर हिंसा और धमकियों में बदल गया।
पीड़ित दुकानदार अनिल कुमार कहार का आरोप है कि 26 जनवरी की शाम कुछ पुलिसकर्मी उनकी दुकान पर नाश्ता करने पहुंचे। जब अनिल ने नाश्ते के पैसे मांगे, तो बात बिगड़ गई। आरोप के मुताबिक, पुलिसकर्मी भड़क गए और कुछ ही देर में डायल-100 वाहन से पहुंचे अन्य पुलिसकर्मियों ने अनिल को जबरन थाने ले जाकर एक कमरे में बंद कर लात-घूंसों से पीटा।
अनिल का कहना है कि मारपीट के दौरान उन्हें झूठे केस में फंसाने की धमकी भी दी गई। यही नहीं, जब उनकी बहन चांदनी बीच-बचाव के लिए थाने पहुंची, तो उसके साथ भी कथित रूप से अभद्रता और मारपीट की गई। इस घटना के बाद पीड़ित परिवार में डर और आक्रोश का माहौल है।
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब दुकानदार ने एसपी कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि पेटीएम के माध्यम से 60 रुपये का भुगतान किया गया था, लेकिन विवाद की असल वजह क्या थी, इसकी गहराई से जांच की जा रही है।
फिलहाल, पुलिस विभाग की साख पर लगे इन आरोपों ने पूरे जिले में चर्चा और बेचैनी बढ़ा दी है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट और उस कार्रवाई पर टिकी हैं, जो यह तय करेगी कि खाकी को शर्मसार करने वालों पर वास्तव में शिकंजा कसा जाएगा या नहीं।







