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एक जाजम पर एकता का संदेश: विनय बाकलीवाल ने संभाली दिगम्बर जैन समाज की कमान

इन्दौर। दिगम्बर जैन समाज (सामाजिक संसद), इन्दौर के इतिहास में 27 जनवरी का दिन एक नई एकता, समन्वय और विश्वास का प्रतीक बन गया, जब एक गरिमामय और भावनात्मक समारोह में विनय बाकलीवाल ने अध्यक्ष पद की शपथ ली। शपथ से पहले और बाद तक सभागृह में बना वातावरण केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही सामाजिक दूरी को पाटने का सशक्त संकेत था।

जाल सभागृह में आयोजित इस ऐतिहासिक आयोजन में 136 जिनालयों के अध्यक्ष, मंत्री, प्रतिनिधि एवं समाज श्रेष्ठियों की बड़ी उपस्थिति रही। दिगम्बर जैन महासमिति, भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थक्षेत्र कमेटी, महिला महासभा, दिगम्बर जैन महासभा एवं दिगम्बर जैन परिषद के राष्ट्रीय व प्रांतीय प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की गरिमा को और ऊँचाई दी। कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण, चित्र अनावरण एवं दीप प्रज्वलन से हुआ।

कार्यक्रम में उस समय निर्णायक क्षण आया, जब दिगम्बर जैन महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक बड़जात्या ने साधारण सभा में 7 जनवरी के निर्णय पर सदन से अनुमोदन मांगा। सभागृह में उपस्थित लगभग 450 समाजजन एक साथ खड़े हो गए। यह दृश्य केवल समर्थन नहीं, बल्कि वर्षों से प्रतीक्षित सामाजिक एकता की उद्घोषणा था। करतल ध्वनि से गूंजते सभागृह में यह स्पष्ट हो गया कि विनय बाकलीवाल का निर्वाचन अब केवल निर्णय नहीं, समाज की सामूहिक स्वीकृति बन चुका है।

अशोक बड़जात्या ने अपने संबोधन में कहा कि समाज का विकास एकता और समन्वय से ही संभव है और खोया हुआ वर्चस्व पुनः प्राप्त करने के लिए एक सक्षम नेतृत्व पर विश्वास आवश्यक है। निवर्तमान अध्यक्ष राजकुमार पाटोदी और नरेंद्र वेद ने 7 जनवरी की संपूर्ण कार्यवाही की पुष्टि करते हुए सर्वसम्मति की बात दोहराई। समन्वय समिति के निर्णय को सामाजिक एकता की दिशा में निर्णायक कदम बताया गया।

इस अवसर पर सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायमूर्ति वी.एस. कोकजे ने जैन समाज के राष्ट्र निर्माण में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि सक्षम नेतृत्व समाज की जटिल समस्याओं के समाधान को सरल बना देता है। उन्होंने विनय बाकलीवाल को अध्यक्ष पद की शपथ दिलाते हुए उन्हें पूरी निष्ठा और जवाबदारी से समाज सेवा का दायित्व निभाने की प्रेरणा दी।

शपथ के बाद विनय बाकलीवाल का उद्बोधन पूरे कार्यक्रम का भावनात्मक केंद्र रहा। उन्होंने देव, शास्त्र, गुरु वंदन के साथ आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के द्वितीय समाधि दिवस पर नमन किया। अपने राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे समाज से कुछ लेने नहीं, बल्कि सेवा करने आए हैं। उन्होंने बीते डेढ़ वर्ष में समन्वय समिति के माध्यम से दोनों सामाजिक संसदों के विवादों के समाधान की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से रखा और बताया कि सर्वसम्मति से उन्हें अध्यक्ष बनाने का निर्णय कैसे लिया गया।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब समाज को लगेगा कि सौहार्द मजबूत हो चुका है और चुनाव का वातावरण बन गया है, वे उसी दिन पद छोड़ने को तैयार हैं। “मेरा उद्देश्य केवल एक है एक सशक्त, संगठित और नेतृत्वकारी दिगम्बर जैन समाज,” उनके इन शब्दों ने सभागृह में गहरी छाप छोड़ी।

कार्यक्रम का संचालन अनामिका बाकलीवाल ने किया, आभार मनीष अजमेरा ने व्यक्त किया। शांतिपाठ के साथ बैठक संपन्न हुई। समारोह में समाज के अनेक प्रमुख पदाधिकारी, उद्योगपति, चिकित्सक, महिलाएं एवं युवा बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

यह आयोजन केवल शपथ समारोह नहीं था, बल्कि इन्दौर से पूरे देश को यह संदेश देने वाला क्षण था कि जब समाज एक जाजम पर बैठता है, तो मतभेद नहीं, भविष्य का निर्माण होता है।

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