गणतंत्र दिवस की सुबह जैसे ही नलखेड़ा स्थित माँ बगलामुखी शक्ति पीठ के कपाट खुले, वातावरण में एक अलग ही ऊर्जा महसूस की गई। मंदिर प्रांगण में कदम रखते ही भक्त ठहर गए क्योंकि आज माँ का स्वरूप कुछ विशेष था, कुछ ऐसा जिसने देखते ही मन को बाँध लिया।
माँ बगलामुखी का भव्य श्रृंगार इस बार देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आया। माँ के दोनों ओर ससम्मान लगाए गए राष्ट्रीय ध्वज, जैसे शक्ति और राष्ट्र की एकता का जीवंत संदेश दे रहे हों। पीले वस्त्रों में विराजमान माँ का तेज आज सामान्य से कहीं अधिक प्रखर प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं शक्ति पीठ गणतंत्र दिवस का उत्सव मना रहा हो।
मंदिर परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। देश ही नहीं, विदेशों से आए श्रद्धालु भी इस अलौकिक दर्शन के साक्षी बने। हर आँख माँ के स्वरूप में कुछ खोज रही थी और हर मन में एक ही भाव अद्भुत, अविस्मरणीय।
बगलामुखी मंदिर में होने वाले विशेष हवन का भी आज अलग महत्व रहा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि में आहुतियाँ डाली गईं, और ऐसा प्रतीत हुआ जैसे पूरा वातावरण ही साधना में लीन हो गया हो। मान्यता है कि यहाँ किया गया हवन भक्तों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाता है, और आज के दिन उस विश्वास को मानो नया बल मिला।
गणतंत्र दिवस पर माँ बगलामुखी का यह विशेष स्वरूप केवल एक श्रृंगार नहीं था, बल्कि शक्ति, आस्था और राष्ट्रभक्ति का दुर्लभ संगम—जो लंबे समय तक श्रद्धालुओं के मन में जीवित रहेगा।







