भागीरथपुरा पुल पर आज वो मंजर देखने को मिला, जिसने हर आने-जाने वाले को झकझोर कर रख दिया। श्मशान जाने से पहले 63 वर्षीय बद्री प्रसाद की अर्थी सड़क के बीच रख दी गई। गुस्से से भरे परिजनों और रहवासियों ने शवयात्रा रोककर चक्काजाम कर दिया। पूरा इलाका ठप हो गया, और माहौल में सिर्फ आक्रोश और सवाल गूंजते रहे।
परिजनों का आरोप है कि बद्री प्रसाद की मौत इलाके में सप्लाई हो रहे दूषित पानी के कारण हुई। उनका कहना है कि लंबे समय से गंदा और बदबूदार पानी पीने को मजबूर लोग बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन आंखें मूंदे बैठा रहा। मौत के बाद जब मदद की उम्मीद थी, तब विभागीय दावों ने जख्मों पर नमक छिड़क दिया।
प्रशासन बनाम परिजन, सड़क पर तकरार
सरकारी मदद पर उठे सवाल, पुलिस कर रही समझाइश
स्वास्थ्य विभाग ने अपना बचाव करते हुए दावा किया कि बद्री प्रसाद की मृत्यु दूषित पानी से नहीं, बल्कि उनकी पुरानी बीमारी के चलते हुई है। इसी आधार पर सरकारी सहायता देने से इनकार कर दिया गया। यह बयान सामने आते ही परिजनों का गुस्सा और भड़क उठा। उनका कहना है कि अगर पानी साफ होता, तो आज यह नौबत नहीं आती।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से बातचीत कर हालात संभालने की कोशिश की। लेकिन सवाल अब भी हवा में तैर रहे हैं — क्या यह सिर्फ एक बीमारी से हुई मौत थी, या दूषित जल हादसे का एक और शिकार? भागीरथपुरा के लोग जवाब चाहते हैं, और सड़कों पर उतरा यह आक्रोश किसी बड़े आंदोलन की आहट दे रहा है।







