राजधानी दिल्ली में एक खतरनाक ट्रेंड तेजी से पांव पसार रहा है। खासकर यमुनापार इलाके में ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं, जहां भरोसा, प्यार और कानून तीनों को एक साथ गिरवी रख दिया गया। यह कोई आम ठगी नहीं, बल्कि बेहद शातिर **सेक्सटॉर्शन गैंग** का सुनियोजित खेल है, जिसमें चौंकाने वाली बात यह है कि वकील और कुछ पुलिसकर्मी भी आरोपों के घेरे में हैं।
कहानी की शुरुआत एक मासूम से मैसेज से होती है। अनजान लड़की, जो खुद को ब्यूटी पार्लर चलाने वाली बताती है, पहले दोस्ती का हाथ बढ़ाती है। बातचीत धीरे-धीरे मीठे शब्दों और भावनात्मक नजदीकियों में बदल जाती है। कारोबारी खुद को खास समझने लगता है और यहीं से जाल कसना शुरू होता है।
पहले मिलने की जगह तय होती है एक रेस्टोरेंट। लेकिन ऐन वक्त पर प्लान बदल जाता है। रेस्टोरेंट नहीं, अब होटल। दीवानगी में डूबा शिकार सच-गलत का फर्क भूल बैठता है। होटल के कमरे में रिश्ते बनते हैं और यहीं खत्म हो जाती है उसकी आज़ादी।
इसके बाद होती है असली एंट्री। अचानक दो वकील सामने आते हैं। साथ ही स्थानीय थाने की पुलिस। आरोप लगता है रेप का। हथकड़ी, जेल और बदनामी का डर दिखाया जाता है। परिवार और समाज में इज्जत मिट्टी में मिलने की धमकी दी जाती है। पीड़ित को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ा जाता है।
डरा-सहमा शिकार आखिरकार अपने परिजनों को थाने बुलाता है। फिर शुरू होता है ‘समझौते’ का खेल। वकील बीच-बचाव करते हैं, पुलिस सहयोग करती है, और कुछ ही घंटों में मामला “सेट” हो जाता है कीमत होती है लाखों रुपये।
रात के अंत में पीड़ित थाने से बाहर तो आ जाता है, लेकिन आत्मसम्मान, भरोसा और जमा-पूंजी सब कुछ वहीं छूट जाता है। घर लौटते वक्त उसे सिर्फ एक एहसास सताता है वह सिर्फ ठगा नहीं गया, बल्कि एक पूरे सिस्टम ने मिलकर उसे लूटा है।
सवाल यह है कि अगर कानून के रक्षक ही शिकारी बन जाएं, तो आम आदमी आखिर जाए तो जाए कहां?







