कनाड़िया थाना क्षेत्र एक बार फिर शर्मनाक सुर्खियों में है। कानून की रक्षा करने वाला खुद कानून की मार झेलने को मजबूर है। पूर्व यातायात क्षेत्र में पदस्थ ट्रैफिक पुलिस जवान अनुराग शर्मा ने जब अपना फर्ज निभाते हुए शराब पीकर गाड़ी चला रहे वाहन चालक को रोका, तो जवाब मिला पत्थर से… और वो भी जानलेवा हमला।
नशे में धुत आरोपी वाहन चालक ने सरेआम वर्दी की इज्जत को कुचल डाला। अनुराग शर्मा पर पत्थर से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। सवाल यह नहीं कि हमला हुआ, सवाल यह है कि हमला होने के बाद भी सिस्टम सोता रहा।
घायल ट्रैफिक जवान का सीधा और गंभीर आरोप है कि घटना के बाद कनाड़िया थाने से कोई मदद नहीं मिली। न गश्त, न त्वरित कार्रवाई, न ही वो तत्परता जिसकी उम्मीद वर्दी वाले को अपने ही विभाग से होती है। क्या अब कानून का मतलब सिर्फ आम आदमी तक सीमित रह गया है? क्या वर्दी पहनने के बाद इंसाफ की गारंटी भी खत्म हो जाती है?
यह घटना सिर्फ एक जवान पर हमला नहीं है, यह पूरे सिस्टम के मुंह पर तमाचा है। अगर फर्ज निभाने की यही कीमत है, तो सवाल उठता है—कल कौन ड्यूटी पर खड़ा होगा? और क्या अगला पत्थर किसी और की जान ले लेगा?
कनाड़िया में आज पत्थर चला है… कल जनता का भरोसा भी चकनाचूर होगा, अगर जिम्मेदार अब भी नहीं जागे।







