इंदौर द्वारकापुरी थाना क्षेत्र से आई यह खबर नहीं, एक तमाचा है उस व्यवस्था पर जो अपराध से पहले भी सोती है और बाद में भी हांफती नजर आती है। मानसिक रूप से कमजोर 22 वर्षीय युवती, घर में अकेली और इसी कमजोरी को भांपकर पड़ोस का युवक दरवाजे तोड़कर नहीं, बल्कि भरोसे की दीवार फांदकर अंदर घुस आता है।
आरोप है कि आस्था पैलेस का निवासी गणेश कहार, निजी कंपनी में नौकरी करने वाला तथाकथित “सभ्य” नागरिक, युवती को कमरे में घसीटता है, जबरन कपड़े उतारने की कोशिश करता है और दरिंदगी की हद तक पहुंच जाता है। यह कोई अचानक हुई गलती नहीं यह सोची-समझी हैवानियत है।
सवाल यह है कि जब माता-पिता शहर से बाहर थे, भाई काम पर था, तब क्या आरोपी को पूरा भरोसा था कि कोई नहीं आएगा? और अगर भाई समय पर नहीं पहुंचता, तो अंजाम क्या होता? यह सोचकर ही रूह कांप जाती है।
भाई के अचानक पहुंचते ही आरोपी मौके से भाग खड़ा हुआ यानी हिम्मत सिर्फ कमजोर पर, और कानून के सामने पूरी कायरता। सूचना मिलते ही माता-पिता इंदौर पहुंचे और थाने में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने छेड़छाड़ का मामला तो दर्ज कर लिया, लेकिन आरोपी फरार है और यही सबसे बड़ा सवाल है।
दो बेटों का पिता, नौकरीपेशा, पड़ोसी और भीतर छुपा शिकारी। क्या ऐसे लोगों के लिए समाज में कोई डर बचा है? या कानून सिर्फ कागजों में सख्त है?
अब देखना यह है कि पुलिस कब तक “तलाश जारी है” की रट लगाए रखती है और कब इस दरिंदे को सलाखों के पीछे पहुंचाती है। क्योंकि अगर आज कार्रवाई ढीली रही, तो कल किसी और घर का दरवाजा निशाना बन सकता है। यह सिर्फ एक मामला नहीं यह चेतावनी है।







