मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र को लेकर सियासी और आर्थिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। 16 फरवरी से 6 मार्च तक चलने वाले इस सत्र में मोहन यादव सरकार कुछ ऐसे फैसले लेने जा रही है, जिनका असर आने वाले कई सालों तक दिखाई दे सकता है।
पहली बार सरकार पारंपरिक बजट से हटकर एक नया प्रयोग करने जा रही है, जिसने पहले ही उम्मीदों का बाजार गर्म कर दिया है।
इस बार का बजट सिर्फ अगले एक साल की कहानी नहीं कहेगा, बल्कि आने वाले तीन वर्षों की दिशा और दशा तय करने वाला माना जा रहा है। रोलिंग बजट के जरिए सरकार अपने विकास एजेंडे को लंबी अवधि के फाइनेंशियल रोडमैप के साथ पेश करेगी। माना जा रहा है कि बजट का फोकस रोजगार सृजन, स्वास्थ्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर रहेगा।
सूत्रों की मानें तो अगले एक साल में करीब 50 हजार नई सरकारी नौकरियों का ऐलान संभव है, जिससे युवाओं को बड़ी राहत मिल सकती है। वहीं 10 लाख से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 35 लाख रुपये तक की केशलैस स्वास्थ्य बीमा योजना बजट की सबसे बड़ी सौगात साबित हो सकती है।
किसानों की आय बढ़ाने के लक्ष्य को लेकर सरकार हर जिले में फूड प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है, जिससे खेती के साथ-साथ स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। शहरी परिवहन को आसान और सस्ता बनाने के लिए सहकार टैक्सी सेवा शुरू करने की तैयारी भी बजट का अहम हिस्सा हो सकती है।
बताया जा रहा है कि मोहन यादव सरकार अपने कार्यकाल का तीसरा पूर्ण बजट पेश करने जा रही है, जिसका आकार करीब 4.65 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर यह बजट न सिर्फ आर्थिक आंकड़ों का दस्तावेज होगा, बल्कि आने वाले चुनावी और विकासात्मक एजेंडे की झलक भी दिखाएगा।







