इरफान को 8 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था। सिर्फ तीन दिन बाद, यानी 11 जनवरी को बिना किसी खुले ट्रायल के उन्हें मौत की सजा सुना दी गई। आरोप बेहद संगीन हैं हिंसा भड़काने और ‘ईश्वर के खिलाफ जंग छेड़ने’ का। सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि अब इस मामले में कोई और सुनवाई नहीं होगी। परिवार को बस 10 मिनट… हां, सिर्फ 10 मिनट दिए जाएंगे आखिरी मुलाकात के लिए। उधर, ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। हिंसक विरोध प्रदर्शनों का आज 18वां दिन है। सड़कों पर गुस्सा है, नाराज़गी है और डर भी।
इस बीच अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भी तनाव तेज हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करती है, तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा। लेकिन तेहरान भी चुप नहीं बैठा। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारिजानी ने पलटवार करते हुए ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ही “ईरान में लोगों का हत्यारा” बता दिया।
अब सवाल ये है क्या इरफान सुलतानी की फांसी विरोध की आग में घी डालेगी? और क्या ईरान और पश्चिमी देशों के बीच टकराव और खतरनाक मोड़ लेगा? देश ही नहीं, दुनिया की नजरें इस वक्त ईरान की उस जेल पर टिकी हैं… जहां एक युवक की जिंदगी, और शायद पूरे आंदोलन की दिशा, तय होने वाली है।







