देश की सबसे बड़ी अदालत ने आखिरकार उस पुलिसिया खेल पर हथौड़ा चला दिया, जो सालों से कानून के नाम पर तमाशा बना हुआ था। 165 से ज़्यादा मामलों में “पॉकेट गवाह” फिट कर केस गढ़ने वाले चंदननगर थाना प्रभारी टीआई इंद्रमणि पटेल को सुप्रीम कोर्ट की सख्त फटकार के बाद कुर्सी से हटा दिया गया। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्ला की अदालत में जो हुआ, वह सिर्फ फटकार नहीं थी, वह पूरे सिस्टम पर करारा तमाचा था। न्यायमूर्ति के शब्द आज भी गूंज रहे हैं
“तुम दुर्भाग्य से उस कुर्सी पर बैठे हो।”
यह मामला सामने लाया एक कानून के छात्र असद अली वारसी ने, जिसने वो कर दिखाया जो बड़े-बड़े सिस्टम नहीं कर पाए। असद ने अदालत में 156 नहीं, पूरे 165 से ज्यादा केसों की सूची रख दी, और हर केस में वही दो नाम चमक रहे थे: सलमान कुरैशी और आमिर रंगरेज हर अपराध के सर्वज्ञ गवाह! शराब तस्करी हो, हथियार जब्ती हो, जुआं हो या फिर NDPS एक्ट, हर जगह वही दो चेहरे। सवाल सीधा है क्या ये दोनों हर अपराध के वक्त सर्वत्र मौजूद रहते थे, या थाना एक ‘गवाह उत्पादन केंद्र’ बन चुका था?
टीआई पटेल ने कोर्ट में बचाव की कोशिश की, कहा कि केस उन्होंने दर्ज नहीं किए, विवेचकों की गलती है। लेकिन कोर्ट ने यह बहाना सिरे से खारिज कर दिया। न्यायमूर्ति ने तल्ख लहजे में कहा “आप थाना प्रभारी हैं, जिम्मेदारी आपकी है। SHO जनता की सुरक्षा के लिए होता है, आतंक फैलाने के लिए नहीं।” सबसे शर्मनाक बात यह रही कि सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद भी थाना नहीं सुधरा। जुआं और NDPS के नए मामलों में फिर वही पुराने पॉकेट गवाह हाजिर कर दिए गए। यानी संदेश साफ था, कानून बोले तो बोले, थाना अपने हिसाब से चलेगा!
आखिरकार मंगलवार देर शाम पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह को भी कार्रवाई करनी पड़ी। कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए टीआई इंद्रमणि पटेल को तत्काल लाइन अटैच कर दिया गया और उसी वक्त थाने से रवानगी भी करा दी गई। यह सिर्फ एक टीआई की कहानी नहीं है। यह उस सिस्टम का आईना है, जहां कानून पढ़ने वाला छात्र न्याय दिला देता है और कानून लागू करने वाला अफसर कटघरे में खड़ा हो जाता है। अब सवाल यह है क्या यह कार्रवाई एक मिसाल बनेगी, या फिर पॉकेट गवाहों का यह खेल किसी और थाने में नए चेहरे के साथ जारी रहेगा?







