झाबुआ जिले की डीआरपी पुलिस लाइन से सामने आई यह घटना पूरे सिस्टम को झकझोर देने वाली है। जिस जगह को सुरक्षा और भरोसे का प्रतीक माना जाता है, वहीं एक सात साल की मासूम बच्ची के साथ कथित रूप से घिनौनी हरकत की गई। आरोपी कोई आम व्यक्ति नहीं, बल्कि पुलिस विभाग में पदस्थ आरक्षक बताया जा रहा है।
घटना शनिवार की है। पुलिस के अनुसार, मासूम बच्ची अपनी छोटी बहन और आरोपी की बेटी के साथ रोज़ की तरह खेल रही थी। खेल-खेल में आरोपी आरक्षक मंगलेश पाटीदार ने बच्ची को चॉकलेट देने का लालच दिया और उसे अपने घर के अंदर बुला लिया। यहीं वह पल आया, जिसने एक मासूम बचपन को दहला दिया।
जांच में सामने आया है कि यह पहली बार नहीं था। आरोपी पहले भी इसी तरह बच्ची को चॉकलेट देकर बहलाता और डराकर चुप कराता रहा। लेकिन इस बार किस्मत ने साथ नहीं दिया।
एफआईआर के मुताबिक, जब बच्ची की मां बच्चों को देखने पहुंची तो बड़ी बेटी दिखाई नहीं दी। आवाज देने पर बच्ची आरोपी के घर से घबराई हुई हालत में बाहर निकली। चेहरे पर डर और आंखों में खौफ साफ झलक रहा था। मां ने जब सख्ती से पूछा, तो बच्ची ने आपबीती सुना दी।
इसके बाद परिजन बिना देरी किए बच्ची को लेकर थाने पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए एएसपी और एसडीओपी मौके पर पहुंचे। महिला अधिकारी की अनुपस्थिति में टीआई नेहा बिरला को बुलाकर तत्काल मामला दर्ज किया गया। आरोपी आरक्षक को हिरासत में लेकर मेडिकल परीक्षण कराया गया और रविवार को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि अगर रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो मासूमों की सुरक्षा आखिर किसके हाथ में है।







