5 दिन तक तड़पता रहा मरीज, इलाज के बीच टूटी सांस, सवालों के घेरे में प्रशासन
इंदौर में दूषित पेयजल से फैल रही बीमारी अब जानलेवा रूप ले चुकी है। इस खामोश आपदा ने एक और जिंदगी निगल ली। कमला बाई के पति तुलसीराम (59) की मौत के साथ ही शहर में दूषित पानी पीने से मरने वालों की संख्या बढ़कर 22 हो गई है, जिससे प्रशासनिक दावों और तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
परिजनों के मुताबिक तुलसीराम को 5-6 जनवरी से लगातार उल्टी और दस्त की शिकायत थी। हालत बिगड़ती चली गई, लेकिन समय पर ठोस इलाज नहीं मिल सका। आखिरकार 7 जनवरी को उन्हें गंभीर अवस्था में एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने इलाज शुरू किया, लेकिन शरीर पहले ही जवाब देने लगा था। 9 जनवरी को उपचार के दौरान तुलसीराम ने दम तोड़ दिया।
इस मौत ने सिर्फ एक परिवार को नहीं तोड़ा, बल्कि पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। जिस पानी को जीवन का आधार माना जाता है, वही पानी अब मौत का कारण बनता जा रहा है। प्रभावित इलाकों में लोग डर के साए में जीने को मजबूर हैं, जबकि जिम्मेदार विभाग अब भी “स्थिति नियंत्रण में है” जैसे औपचारिक बयानों तक सीमित नजर आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि
जब मौतों का आंकड़ा 22 तक पहुंच चुका है, तो आखिर कार्रवाई कब होगी?
क्या और जिंदगियां जाने के बाद ही दूषित पानी की समस्या को गंभीरता से लिया जाएगा?
इंदौर आज जवाब मांग रहा है
पानी में जहर किसने मिलाया और कब रुकेगा यह मौतों का सिलसिला?







