इंदौर के लसूड़िया इलाके में गुरुवार को एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने राहगीरों को रोककर सोचने पर मजबूर कर दिया। सड़क के बीच एक युवक को चप्पलों से पीटती युवती और आसपास जुटती भीड़ यह महज गुस्से का इज़हार नहीं था, बल्कि महीनों से चली आ रही पीड़ा का विस्फोट था।
पीड़िता एक निजी कॉल सेंटर में कार्यरत रही 33 वर्षीय युवती है। उसकी शिकायत के अनुसार, उसी कॉल सेंटर में एमओ पद पर कार्यरत मोहम्मद अब्दुल सलाम नवंबर 2025 से उसे लगातार परेशान कर रहा था। दोस्ती के नाम पर दबाव, भविष्य संवारने के झूठे वादे और निजी दायरे में दखल सब कुछ धीरे-धीरे डर में बदलता चला गया।
युवती का आरोप है कि जब उसने साफ इनकार किया तो आरोपी ने कथित तौर पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाना शुरू कर दिया और कहा कि “सब कुछ सेट” कर देगा। मानसिक तनाव इतना बढ़ा कि दिसंबर 2025 में युवती को नौकरी से इस्तीफा देना पड़ा, हालांकि नोटिस पीरियड के कारण उसे दो महीने और काम करना पड़ा।
लेकिन कहानी यहीं नहीं रुकी।
पीड़िता के अनुसार, नौकरी छोड़ने की जानकारी मिलते ही आरोपी ने उसका पीछा करना शुरू कर दिया। गुरुवार को कथित तौर पर उसने युवती का हाथ पकड़ लिया। इस बार युवती ने चुप रहने के बजाय विरोध किया। आरोपी मौके से भागा, लेकिन मामला थमा नहीं।
घबराई युवती ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं से संपर्क किया। कार्यकर्ताओं ने आरोपी को ढूंढ निकाला। वहीं, गुस्से और दर्द से भरी युवती का सब्र टूट गया और उसने युवक की चप्पलों से पिटाई कर दी। कुछ ही देर में पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी को हिरासत में ले लिया।
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ छेड़छाड़ समेत गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है। वहीं बजरंग दल के पदाधिकारियों का दावा है कि आरोपी के मोबाइल फोन से कई अन्य युवतियों के नंबर और कथित तौर पर आपत्तिजनक चैट भी बरामद हुई हैं।
फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की जांच जारी है। सवाल अब सिर्फ एक युवती के गुस्से का नहीं, बल्कि उस खामोशी का है, जो अक्सर ऐसे मामलों में देर से टूटती है।







