गुरुवार की सुबह… घड़ी में ठीक 6 बजे थे। कोलकाता की गलियां अभी नींद में थीं, तभी प्रवर्तन निदेशालय की गाड़ियों ने अचानक रफ्तार पकड़ी। निशाना था पॉलिटिकल कंसल्टेंट फर्म I-PACऔर उसके डायरेक्टर प्रतीक जैन, जो तृणमूल कांग्रेस के आईटी सेल के हेड भी हैं। मामला मनी लॉन्ड्रिंग का।
कोलकाता समेत पश्चिम बंगाल के 6 और दिल्ली के 4 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू हुई। कोलकाता में प्रतीक जैन उसी वक्त अपने घर पर मौजूद थे। शुरुआती घंटे खामोशी में बीते… लेकिन करीब 11:30 बजे माहौल अचानक बदल गया।
सबसे पहले कोलकाता पुलिस कमिश्नर प्रतीक जैन के आवास पहुंचे। कुछ ही देर बाद राजनीति की सबसे ताकतवर एंट्री हुई खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लाउडन स्ट्रीट स्थित उनके घर पहुंच गईं। कैमरे, सुरक्षाकर्मी और सन्नाटा सब एक साथ ठहर गया।
ममता बनर्जी कुछ देर अंदर रहीं। जब बाहर निकलीं, तो उनके हाथ में थी एक हरी फाइल और इसी फाइल ने सवालों की बाढ़ ला दी। बिना रुके वे सीधे I-PAC के ऑफिस पहुंचीं। वहां से उनका बयान और ज्यादा तीखा था।
ममता बनर्जी ने साफ कहा
“गृहमंत्री मेरी पार्टी के दस्तावेज उठवा रहे हैं।”
यह बयान आते ही जांच एजेंसी की कार्रवाई सियासी रंग ले चुकी थी। सवाल अब सिर्फ मनी लॉन्ड्रिंग का नहीं था सवाल यह था कि
क्या यह कानून की निष्पक्ष कार्रवाई है, या चुनावी राजनीति का नया अध्याय?
हरी फाइल में क्या है?
ED की जांच किस दिशा में जाएगी?
और क्या बंगाल की राजनीति में यह छापा किसी बड़े टकराव की शुरुआत है?
जवाब अभी बाकी हैं… लेकिन इतना तय है
गुरुवार की यह सुबह, देर रात तक चर्चा का सबसे बड़ा मुद्दा बनी रहेगी।







