सीहोर जिले की जावर तहसील का छोटा सा गांव डोडी… और अंदर ही अंदर चल रहा था लोगों की सेहत से खिलवाड़ का गंदा खेल। आष्टा क्षेत्र में प्रशासन ने जब छापा मारा तो सच ऐसा निकला कि सुनकर गुस्सा भी आए और हैरानी भी। किराए के मकान में “सांची” ब्रांड के नाम पर नकली घी तैयार किया जा रहा था वो भी पूरे 792 किलो!
तहसीलदार ओमप्रकाश चोरमा की अगुवाई में हुई कार्रवाई में सांची कंपनी के फर्जी रैपर, पैकिंग सामग्री और वनस्पति घी के टीन बड़ी मात्रा में बरामद हुए। मतलब साफ है यह कोई छोटा-मोटा खेल नहीं था, बल्कि पूरी प्लानिंग के साथ चल रहा संगठित धंधा था। एसडीएम नितिन टाले के मुताबिक, यह अवैध फैक्ट्री डोडी निवासी मानसिंह सेंधव के मकान में संचालित हो रही थी, जबकि कल्याणपुरा का गौरव वर्मा नकली घी बनाकर उसे सांची के नाम से बाजार में खपा रहा था। और जैसे ही प्रशासन पहुंचा आरोपी मौके से फरार!
रैपर असली जैसे, इरादे पूरी तरह नकली! आखिर ये नेटवर्क कितना गहरा है?
सबसे चौंकाने वाली बात सांची कंपनी के असली जैसे दिखने वाले रैपर और पैकिंग सामग्री भारी मात्रा में बरामद हुई। अब बड़ा सवाल ये है कि ये फर्जी पैकिंग आरोपी तक पहुंची कैसे? क्या यह अकेले का खेल है या पीछे पूरा नेटवर्क काम कर रहा है?
यह कोई गलती नहीं, यह सीधा-सीधा जनता की सेहत के साथ धोखा है। लोगों का भरोसा, उनकी कमाई और उनके बच्चों की सेहत सबको दांव पर लगा दिया गया सिर्फ लालच के लिए। प्रशासन ने जब्त सामग्री को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। खाद्य विभाग सैंपल की जांच करेगा, ताकि यह पता चल सके कि इस नकली घी में क्या-क्या मिलाया गया था। एसडीएम नितिन टाले ने सख्त कार्रवाई की बात कही है लेकिन जनता पूछ रही है, क्या सिर्फ कार्रवाई काफी है? या ऐसे गोरखधंधों की जड़ तक पहुंचने की जरूरत है?
डोडी की इस नकली फैक्ट्री ने एक बार फिर साबित कर दिया मुनाफे के लिए कुछ लोग किसी भी हद तक गिर सकते हैं। अब देखना यह है कि फरार आरोपी कब तक बचता है… और इस पूरे खेल के पीछे छिपे चेहरे कब बेनकाब होते हैं।







