मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर कानून-व्यवस्था और कथित फर्जी मुकदमों को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी की बैठक के बाद कांग्रेस ने बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
कांग्रेस का दावा है कि प्रदेश में बीजेपी सरकार के दौरान करीब 62 लाख केस छोटी-छोटी धाराओं में दर्ज किए गए हैं। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि इनमें बड़ी संख्या ऐसे मामलों की है, जो सरकार के दबाव में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज किए गए।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि प्रदेश में भाजपा सरकार पुलिस का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इन कथित फर्जी मुकदमों के खिलाफ सड़क से लेकर कानूनी स्तर तक लड़ाई लड़ेगी।
वहीं, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं को डराने और दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने साफ किया कि पार्टी अब ऐसे मामलों को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा करेगी।
कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर कथित फर्जी मुकदमों का सिलसिला नहीं रुका, तो पार्टी जेल भरो आंदोलन शुरू करेगी। यानी आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत में आंदोलन और विरोध का दौर और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।
बैठक के बाद कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव से जुड़े विवाद को भी बड़ा मुद्दा बनाने का ऐलान किया। कांग्रेस के मुताबिक, जून में हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन फॉर्म खारिज किया गया था।
कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लेकर मध्यप्रदेश विधानसभा के प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा के खिलाफ कोर्ट में केस दायर करने की बात कही है।
कांग्रेस का कहना है कि वह इस पूरे मामले को कानूनी तरीके से चुनौती देगी। ऐसे में 62 लाख कथित मुकदमों का मुद्दा और राज्यसभा नामांकन विवाद—दोनों ही आने वाले दिनों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव को और बढ़ा सकते हैं।
अब देखना होगा कि कांग्रेस के इन गंभीर आरोपों पर बीजेपी क्या जवाब देती है और क्या प्रदेश की राजनीति में प्रस्तावित जेल भरो आंदोलन वास्तव में बड़ा आंदोलन बन पाता है।







