देवास से सामने आई यह घटना एक ऐसे आश्रम पर गंभीर सवाल खड़े करती है, जिसे मुश्किल हालात से गुजर रही महिलाओं और लड़कियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बताया जाता था।
दावा था कि आश्रम की चारदीवारी के भीतर उन्हें सुरक्षा, सहारा और बेहतर जिंदगी देने की कोशिश की जाती है। लेकिन 6 नवंबर 2020 को सामने आई एक घटना ने इन दावों पर ही सवाल खड़े कर दिए।
एक गर्भवती युवती को दो महिलाएं जिला अस्पताल लेकर पहुंचीं और वहां छोड़कर चली गईं। सबसे हैरान करने वाली बात यह थी कि युवती बोल नहीं सकती थी और सामान्य तरीके से अपनी बात बताने की स्थिति में भी नहीं थी।
अस्पताल में जांच के बाद उसकी हालत साफ हुई और अगले ही दिन युवती ने एक बच्ची को जन्म दिया।
मामला और गंभीर तब हो गया, जब युवती ने इशारों के जरिए अपने साथ हुई घटना के बारे में जानकारी देने की कोशिश की। उसके संकेतों से दुष्कर्म की आशंका सामने आई और इसके बाद जांच का दायरा आश्रम तक पहुंचा।
जांच के दौरान आश्रम में छापा मारा गया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तलाशी के दौरान वहां सेक्स पावर बढ़ाने वाली दवाएं मिलने की बात भी सामने आई, जिसने पूरे मामले को और संदिग्ध बना दिया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही था कि जिस जगह को बेसहारा और परेशान महिलाओं के लिए सुरक्षित बताया जाता था, वहां आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक युवती गर्भवती हो गई?
यह मामला सिर्फ एक युवती की पीड़ा तक सीमित नहीं था, बल्कि आश्रम में रहने वाली दूसरी महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता था।
पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल सामने रखा कि संरक्षण के नाम पर चलने वाली संस्थाओं में निगरानी और जवाबदेही कितनी जरूरी है। आखिर उस युवती के साथ क्या हुआ, इसके लिए जिम्मेदार कौन था और आश्रम की व्यवस्था में ऐसी घटना कैसे हुई—इन सवालों के जवाब जांच के जरिए तलाशे गए।







