इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी अब सिर्फ एक समस्या नहीं, बल्कि जानलेवा संकट बन चुका है। अब तक 23 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 39 मरीज अस्पताल में भर्ती हैं। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 10 मरीज आईसीयू में हैं और तीन की सांसें वेंटिलेटर के सहारे चल रही हैं। इलाके में डर इस कदर है कि लोग नल खोलने से पहले भी कांप रहे हैं।
स्थिति बिगड़ने के बाद नगर निगम ने पाइपलाइन से पानी की सप्लाई बंद कर टैंकरों से पानी देना शुरू किया है। मंगलवार को निगम ने ओवरहेड टैंक से पानी छोड़कर पाइपलाइन की जांच की, लेकिन यह पानी इस्तेमाल के लिए नहीं था। नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल ने साफ कहा कि यह केवल लीकेज चेक करने के लिए छोड़ा गया पानी है। सैंपल लिए गए हैं और रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय होगी।
इधर, दैनिक भास्कर के 10 रिपोर्टरों ने मंगलवार को इंदौर के 6 वार्डों में पानी की हकीकत को लाइव दिखाया। वार्ड नंबर 22, 39, 52 और 56 में हालात बेहद डरावने हैं। नलों से गंदा, बदबूदार और झागदार पानी निकल रहा है। कई जगह तो पानी में कीड़े तक नजर आए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि नल खोलते ही जो पहला पानी आता है, उसे फेंकना मजबूरी है। एक निवासी ने कहा—
“अगर ये पानी बहाया नहीं तो बीमार पड़ना तय है… और बीमार पड़े तो जान भी जा सकती है।”
भागीरथपुरा से शुरू हुआ यह संकट अब पूरे शहर के लिए चेतावनी बन गया है। सवाल यही है
जब पानी ही ज़हर बन जाए, तो शहर कैसे सुरक्षित रहेगा?







