मणिपुर में कुकी और नगा समुदाय के बीच बढ़ते तनाव ने पहाड़ी इलाकों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई क्षेत्रों में लगातार सात दिनों से स्कूल और बाजार बंद हैं, जबकि सात पहाड़ी जिलों से संपर्क भी प्रभावित बताया जा रहा है।
सड़कों और हाईवे पर नाकेबंदी के कारण लोगों की आवाजाही मुश्किल हो गई है। हालात ऐसे हैं कि स्थानीय लोगों के लिए रोजमर्रा की जरूरतों का सामान जुटाना भी चुनौती बनता जा रहा है।
हिंसा और रास्तों में रुकावट का सीधा असर जरूरी सामान की सप्लाई पर पड़ा है। कांगपोकपी के कुछ गांवों में चीनी की कीमत 400 से 450 रुपये प्रति किलो तक पहुंचने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, डर का माहौल इतना ज्यादा है कि कई लोग घरों से बाहर निकलने से भी बच रहे हैं।
सबसे गंभीर चिंता मेडिकल इमरजेंसी को लेकर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि खेतों तक पहुंचना मुश्किल है और किसी आपात स्थिति में अस्पताल या एयरपोर्ट तक पहुंचना भी आसान नहीं रह गया है।
इसी बीच पिछले चार दिनों में चार महिलाओं समेत छह कुकी लोगों की हत्या का आरोप लगाया गया है। कुकी संगठनों ने इन घटनाओं के लिए नगा समुदाय को जिम्मेदार ठहराया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है और मामले को लेकर जांच तथा संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान महत्वपूर्ण होंगे।
स्थानीय संगठनों के मुताबिक, फरवरी में शुरू हुई हिंसा के बाद इस साल अब तक करीब 40 लोगों की मौत हो चुकी है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि लगातार बंद और नाकेबंदी के बीच आम लोगों तक जरूरी सामान और स्वास्थ्य सेवाएं कैसे पहुंचेंगी और क्षेत्र में सामान्य स्थिति कब बहाल होगी।






