नेपाल में 26 अगस्त की भीषण बाढ़ ने जो तबाही मचाई, उसके जख्म अभी भरे भी नहीं हैं कि अब एक और बड़े खतरे की आशंका ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।
पहाड़ों पर लगातार बर्फ और चट्टानों के खिसकने से नदियों का प्राकृतिक रास्ता बाधित हो सकता है। ऐसे में कहीं पानी जमा हुआ और अचानक बांध टूटने जैसी स्थिति बनी, तो नीचे बसे इलाकों में तेज रफ्तार से बाढ़ का पानी पहुंच सकता है। विशेषज्ञों ने हिंदू कुश हिमालय में तेजी से पिघलते ग्लेशियरों को लेकर भी चिंता जताई है।
इस प्राकृतिक आपदा में अब तक 1,127 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 4,600 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मृतकों में नौ लोगों के शव भारत में भी मिले हैं। लापता लोगों में करीब 500 विदेशी नागरिकों के शामिल होने की बात सामने आई है।
बाढ़ के एक सप्ताह बाद भी राहत और बचाव अभियान जारी है। कई इलाकों में सड़कें, पुल और संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने के कारण रेस्क्यू टीमों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
सबसे दर्दनाक तस्वीर उन परिवारों की है, जिन्होंने एक ही झटके में अपनों को खो दिया। बिदुर की एक नेपाली लड़की ने बताया कि इस आपदा में उसने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। यह बयान इस त्रासदी की भयावहता को बयां करने के लिए काफी है।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में लोग अभी भी अस्थायी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। एक तरफ उन्हें राहत और पुनर्वास की उम्मीद है, तो दूसरी तरफ पहाड़ों से आने वाले पानी का डर लगातार बना हुआ है।
नेपाल के सामने अब चुनौती सिर्फ मलबा हटाने और लोगों को बचाने की नहीं, बल्कि संभावित दूसरी बाढ़ से निपटने की भी है। प्रशासन और राहत एजेंसियों के लिए आने वाले दिन बेहद अहम माने जा रहे हैं।







