इंदौर की सियासत में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर एक दिलचस्प मामला सामने आया है। मीडिया से बातचीत नहीं करने का उनका ऐलान ज्यादा देर तक कायम नहीं रह सका। महज एक दिन बाद ही विजयवर्गीय मीडिया के सामने आए और खुलकर बातचीत भी की।
दरअसल, गुरुवार को एक कार्यक्रम के बाद जब पत्रकारों ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से बातचीत करने की कोशिश की, तो उन्होंने मीडिया से बात करने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने यहां तक कह दिया था कि वे इंदौर के मीडिया से बात नहीं करेंगे।
लेकिन अगले ही दिन तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर इंदौर में निकलने वाली झांकियों में कैलाश विजयवर्गीय शामिल हुए। इसी दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत की और झांकियों को लेकर अपनी प्रतिक्रिया भी दी।
विजयवर्गीय ने इंदौर की जनता को बधाई देते हुए कहा कि शहर में निकलने वाली झांकियां इंदौर की जनता के सहयोग से ही संभव हो रही हैं। उन्होंने झांकियों के आयोजन और जनता की भागीदारी को लेकर अपनी बात रखी।
अब सियासी गलियारों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर चर्चा होना स्वाभाविक है। गुरुवार को मीडिया से दूरी बनाने की बात और शुक्रवार को कैमरों के सामने बातचीत—इस बदलाव ने पूरे मामले को दिलचस्प बना दिया है।
हालांकि, यह भी एक तथ्य है कि जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों के लिए मीडिया जनता तक अपनी बात पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम है। सरकार और जनता के बीच संवाद कायम रखने में पत्रकारों की भूमिका अहम होती है।
ऐसे में विजयवर्गीय का अगले ही दिन मीडिया से बातचीत करना यह दिखाता है कि उनका मीडिया से दूरी बनाने वाला फैसला ज्यादा लंबा नहीं चला।
इंदौर की झांकियों के बीच हुआ यह छोटा सा राजनीतिक घटनाक्रम अब चर्चा में है—क्योंकि बात सिर्फ एक दिन की कसम की नहीं, बल्कि मंत्री और मीडिया के रिश्ते की भी है।






