कर्नाटक में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बी.वाई. विजयेंद्र और विपक्ष के नेता आर. अशोक को खुली चुनौती दी है। खड़गे ने कहा कि दोनों नेता बिना किसी कागज या टेलीप्रॉम्प्टर की मदद लिए ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण गाकर दिखाएं। अगर वे ऐसा कर देते हैं, तो वह अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।
दरअसल, विवाद की शुरुआत कर्नाटक सरकार के 8 सितंबर के आदेश से हुई। राज्य सरकार ने अपने सरकारी कार्यक्रमों और आधिकारिक समारोहों में ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरे गाने का निर्देश दिया है। हालांकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में यह व्यवस्था लागू नहीं होगी।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य अलग-अलग सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर एकरूपता, सम्मान और उचित प्रोटोकॉल बनाए रखना है। वहीं, इस फैसले को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
इसी बीच प्रियांक खड़गे ने बीजेपी नेताओं की आलोचना करते हुए कहा कि अगर वे ‘वंदे मातरम’ के सभी अंतरे बिना कागज या टेलीप्रॉम्प्टर के याद से गा सकते हैं, तो वे इस्तीफा देने के लिए तैयार हैं। उनका यह बयान अब कर्नाटक की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।
दूसरी तरफ, केंद्र के दिशा-निर्देशों को लेकर भी इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं। केंद्र की ओर से जारी निर्देशों में ‘वंदे मातरम’ के आधिकारिक संस्करण और उसके गायन से जुड़े प्रोटोकॉल का उल्लेख किया गया है। गृह मंत्रालय की वेबसाइट पर राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान से संबंधित आधिकारिक दिशा-निर्देश उपलब्ध हैं। (
यानी एक तरफ कर्नाटक सरकार सरकारी कार्यक्रमों में पहले दो अंतरों की व्यवस्था पर कायम है, तो दूसरी तरफ बीजेपी इसे लेकर सवाल उठा रही है। अब प्रियांक खड़गे की चुनौती के बाद देखना होगा कि इस सियासी विवाद में आगे कौन सा नया मोड़ आता है।




