मध्यप्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने कई जिलों में हालात बिगाड़ दिए हैं। नदियां और बांध उफान पर हैं, कई इलाकों में घरों और सड़कों पर पानी, कीचड़ और मलबा जमा हो गया है। सबसे चिंताजनक तस्वीर सिंगरौली से सामने आई है, जहां तेज बहाव में पति-पत्नी के बह जाने की खबर है।
उधर चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। नदी करीब 30 फीट उफान पर है। गोरगी बांध फूटने के बाद कई इलाकों में पानी भर गया, जबकि तेज बहाव की चपेट में रामघाट का बड़ा पुल भी बह गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद अब सड़कों और घरों में मिट्टी, कचरा और कीचड़ का अंबार लगा हुआ है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रविवार को चित्रकूट पहुंचकर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लिया। उन्होंने आश्रय स्थल में प्रभावित लोगों से मुलाकात की और राहत सामग्री वितरित की। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए कि प्रभावित लोगों की जिंदगी जल्द से जल्द सामान्य की जाए और राहत एवं बचाव कार्य में किसी तरह की लापरवाही न हो।
सीएम ने चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति पर अतिक्रमण को भी संभावित वजहों में शामिल बताया। यानी प्रशासन अब बाढ़ के कारणों और जल निकासी व्यवस्था की भी समीक्षा कर सकता है।
इधर शहडोल में स्थित बाणसागर डैम भी पानी से लबालब हो चुका है। डैम में पानी की आवक तेजी से बढ़ी है। जहां पहले आवक 808.64 क्यूमेक्स थी, वहीं 12 घंटे में यह बढ़कर 2677.29 क्यूमेक्स तक पहुंच गई। पिछले साल की तुलना में इस बार डैम का जलस्तर करीब 13 सेंटीमीटर ज्यादा बताया जा रहा है।
बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दोपहर 12 बजे बाणसागर डैम के 6 गेट खोल दिए गए। इसके बाद निचले इलाकों में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। लोगों से नदी और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।
लगातार बारिश और बांधों से छोड़े जा रहे पानी ने मध्यप्रदेश के कई इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती लोगों की सुरक्षा के साथ-साथ बाढ़ के बाद पैदा हुई तबाही को जल्द सामान्य करना है।







