मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने हर माता-पिता और हर प्रतियोगी छात्र के दिल को झकझोर दिया है। डॉक्टर बनने का सपना लेकर दिन-रात मेहनत करने वाली आकांक्षा चतुर्वेदी अब इस दुनिया में नहीं है। पीछे छूट गया है उसका दर्द, उसकी अधूरी उम्मीदें और एक ऐसा सुसाइड नोट, जिसे पढ़कर हर आंख नम हो रही है।
आकांक्षा ने अपने आखिरी शब्दों में लिखा, “मम्मी-पापा, आपको भरोसा था कि आपकी बेटी डॉक्टर बनेगी, लेकिन अब दोबारा नीट का पेपर देने की हिम्मत नहीं है मेरे अंदर। सॉरी मम्मी-पापा, मैंने सब बर्बाद कर दिया।” यह सिर्फ एक चिट्ठी नहीं, बल्कि उस मानसिक दबाव की दर्दनाक कहानी है, जिससे लाखों प्रतियोगी छात्र गुजरते हैं।
परिजनों का आरोप है कि नीट पेपर लीक की खबरों के बाद आकांक्षा गहरे सदमे में चली गई थी। उसे लगने लगा था कि उसकी मेहनत और सपनों का कोई मूल्य नहीं बचा है। पहले प्रयास में अच्छे अंक आने की उम्मीद रखने वाली छात्रा के मन में यह डर घर कर गया था कि अब निष्पक्ष परीक्षा और बेहतर भविष्य की कोई गारंटी नहीं है।
मऊगंज के मगनिया गांव में आज सन्नाटा पसरा है। जिस बेटी के डॉक्टर बनने के सपने पूरे गांव ने देखे थे, उसकी यादों में पूरा परिवार टूट चुका है। यह घटना सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं, बल्कि उस व्यवस्था और दबाव पर भी बड़ा सवाल है, जो कभी-कभी युवाओं की उम्मीदों को ही निगल जाता है।







