ड्रग, बंदूक, कारतूस और मोर: सवाल ये नहीं कि मिला क्या, सवाल ये है कि छुपा कौन रहा था
रतलाम ज़िले के चिकलाना गांव में जो सामने आया है, वो सिर्फ एक ड्रग फैक्ट्री नहीं है, ये सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है। आधी रात करीब ढाई बजे, जब पूरा इलाका नींद में डूबा था, तभी पुलिस ने कालूखेड़ा थाना क्षेत्र में ऐसा छापा मारा कि नशे के सौदागरों की रूह कांप गई।
मौके से 10 किलो से ज्यादा एमडी ड्रग। तीन करोड़ रुपये का केमिकल। 12 बोर की बंदूक। 91 जिंदा कारतूस। और हैरानी की हद तो तब पार हो गई जब उसी परिसर से दो मोर और चंदन की लकड़ियां भी बरामद हुईं। सवाल साफ है, ये फैक्ट्री थी या कानून का मज़ाक उड़ाने का अड्डा?
पुलिस ने 16 लोगों को हिरासत में लिया है और अधिकारी अब भी मौके पर डटे हुए हैं। जांच जारी है, लेकिन जो तस्वीर उभर रही है, वो बेहद डरावनी है। ये कोई गली-मोहल्ले का अपराध नहीं, ये एक संगठित, सुनियोजित और बेखौफ नेटवर्क की बू है।
और अब आते हैं उस नाम पर, जिसने इस पूरे मामले को और ज़्यादा विस्फोटक बना दिया है। जिस मकान में ये अवैध फैक्ट्री चल रही थी, वो दिलावर खान पठान का बताया जा रहा है। वही दिलावर, जिसने जावरा से विधानसभा चुनाव लड़ा। वही दिलावर, जो आजाद समाज पार्टी से जुड़ा रहा। वही दिलावर, जिसे यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर का करीबी बताया जा रहा है।
सवाल चुभने वाले हैं। क्या राजनीति की छांव में नशे का कारोबार फल-फूल रहा था? क्या चुनाव लड़ना अब अपराधों के लिए ढाल बन गया है? और सबसे बड़ा सवाल, अगर पुलिस की रेड न पड़ती, तो ये फैक्ट्री और कितनी जिंदगियां तबाह करती?
रतलाम की ये रात सिर्फ एक रेड नहीं थी। ये चेतावनी है। नशे के सौदागरों के लिए भी, और उन चेहरों के लिए भी जो खुद को साफ दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि हाथ गंदे हैं। जांच जारी है, लेकिन जनता अब जवाब मांग रही है, और इस बार जवाब टालना इतना आसान नहीं होगा।







