दिल्ली में इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालकर जंतर-मंतर की ओर कूच किया। वहीं देहरादून में कांग्रेस कार्यकर्ता सचिवालय की ओर बढ़े, जहां पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की।
बिहार की राजधानी पटना में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। देश के कई अन्य हिस्सों में भी SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन देखने को मिला।
विवाद की बड़ी वजह चुनावी मतदाता सूचियों के SIR से जुड़ी प्रक्रिया है। इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। साथ ही SIR से जुड़े फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों को चुनौती दी गई है।
याचिका में करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों की SIT जांच की मांग भी की गई है। हालांकि, ये आरोप याचिका में किए गए दावे हैं और इन पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है।
इस पूरे विवाद को उस रिपोर्ट के बाद भी तूल मिला, जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 बार आपत्ति दर्ज की थी। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़े फैसले दोनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी के साथ सर्वसम्मति से लिए गए।
उधर, कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने भी ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे की डेडलाइन दी थी। पार्टी ने कहा है कि इस्तीफा नहीं होने पर 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
अब नजर इस बात पर है कि SIR को लेकर चल रहा राजनीतिक और कानूनी विवाद आगे किस दिशा में जाता है और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर क्या कार्रवाई होती है।







