भदौरा स्थित आयुष्मान कॉलेज ऑफ नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कॉलेज की मान्यता को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। NSUI ने कॉलेज के संचालन और प्रबंधन को भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा के बेटे अनुप मिश्रा और बहू बीना मिश्रा समेत अन्य लोगों से जुड़े होने का आरोप लगाया है। संगठन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
विवाद का सबसे बड़ा केंद्र कॉलेज को मिली 120 सीटों की मान्यता और निरीक्षण प्रक्रिया है। NSUI का दावा है कि 24 जुलाई को हुए निरीक्षण के दौरान कॉलेज का भवन पूरी तरह तैयार नहीं था। इसके बावजूद बीएससी नर्सिंग की 60 और जीएनएम की 60 सीटों को मंजूरी दे दी गई।
NSUI प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि निरीक्षण के वक्त परिसर में निर्माण और पुताई का काम चल रहा था। संगठन का यह भी दावा है कि जिस भवन का निरीक्षण किया गया, वह पहले शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के रूप में इस्तेमाल होता था और वहां करीब 20 दुकानें थीं।
NSUI के मुताबिक, निरीक्षण से पहले इन दुकानों पर नर्सिंग कॉलेज से जुड़े पोस्टर और बैनर लगाए गए और परिसर को कॉलेज के रूप में तैयार किया गया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
वहीं भाजपा सांसद डॉ. राजेश मिश्रा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह कॉलेज उनका नहीं है और उनका इससे किसी भी तरह का संबंध नहीं है।
अब सवाल सिर्फ कॉलेज की मान्यता का नहीं, बल्कि निरीक्षण प्रक्रिया की पारदर्शिता का भी है। क्या नियमों के मुताबिक सभी जरूरी मानकों की जांच हुई थी? 120 सीटों की मान्यता किस आधार पर दी गई? और क्या निरीक्षण के दौरान कॉलेज की वास्तविक स्थिति मान्यता के मानकों के अनुरूप थी?
इन सवालों के जवाब अब जांच के बाद ही साफ होंगे। फिलहाल आरोपों और खंडन के बीच भदौरा नर्सिंग कॉलेज की मान्यता का मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।




