नीम करौली बाबा की आध्यात्मिक विरासत आज एक नए विवाद के केंद्र में है। बाबा के जिस पुश्तैनी घर में उनका बचपन बीता, उसी संपत्ति को लेकर परिवार और ट्रस्ट के बीच अधिकारों की लड़ाई सामने आई है।
मामला तब चर्चा में आया, जब बाबा की छह पोतियों ने जिलाधिकारी से शिकायत कर ट्रस्ट के सचिव संजय गुप्ता पर पुश्तैनी संपत्ति पर कब्जा करने का आरोप लगाया। पोतियों का दावा है कि जिस घर और जमीन को वे पारिवारिक विरासत मानती हैं, उस पर ट्रस्ट की ओर से अपना अधिकार जताया जा रहा है।
वहीं, परिवार की ओर से सामने आए बाबा के एक पोते ने इन आरोपों से अलग तस्वीर पेश की है। उनका कहना है कि विवाद को बढ़ाने में उनके छह बहनोई की भूमिका है और परिवार के भीतर ही मतभेद पैदा किए जा रहे हैं।
यानी एक तरफ पोतियां ट्रस्ट पर कब्जे का आरोप लगा रही हैं, तो दूसरी तरफ परिवार का ही एक सदस्य विवाद के पीछे रिश्तेदारों को जिम्मेदार बता रहा है।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर नीम करौली बाबा की जन्मस्थली और पुश्तैनी घर का कानूनी मालिक कौन है? क्या संपत्ति अब भी परिवार के नाम है, या इसे किसी ट्रस्ट को सौंपा जा चुका है? और अगर ट्रस्ट का दावा है, तो उसके पास इसके समर्थन में कौन से वैध दस्तावेज हैं?
मामले की तस्वीर जमीन के कागजात, रजिस्ट्री, उत्तराधिकार और अन्य कानूनी दस्तावेजों की जांच के बाद ही पूरी तरह साफ हो सकेगी।
खास बात यह भी है कि नीम करौली बाबा से जुड़ी इस विरासत को लेकर विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब उत्तर प्रदेश सरकार उनकी स्मृतियों से जुड़े क्षेत्र में कॉरिडोर विकसित करने की तैयारी कर रही है।
ऐसे में यह सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि बाबा की ऐतिहासिक विरासत, संपत्ति के अधिकार और उसके भविष्य के प्रबंधन से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है।
अब नजर इस बात पर है कि प्रशासनिक जांच और उपलब्ध दस्तावेज इस विवाद में किसके दावे को सही ठहराते हैं।







