अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते वैश्विक तनाव का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और एविएशन फ्यूल महंगा होने से हवाई सफर पहले के मुकाबले काफी महंगा हो गया है। इसका सीधा असर देवी अहिल्या बाई होलकर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर देखने को मिल रहा है, जहां यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
अप्रैल 2026 के आंकड़ों के अनुसार, बीते एक साल में यह सबसे कम यात्री संख्या रही। पूरे महीने में कुल 3 लाख 46 हजार 8 यात्रियों ने यात्रा की, जिनमें 1 लाख 72 हजार 725 यात्री इंदौर पहुंचे, जबकि 1 लाख 73 हजार 283 यात्रियों ने यहां से उड़ान भरी। यह गिरावट न सिर्फ आंकड़ों में बल्कि एयरपोर्ट की गतिविधियों में भी साफ नजर आ रही है।
महंगे टिकट और बंद अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बनी बड़ी वजह
यात्रियों की कमी के पीछे कई बड़े कारण सामने आ रहे हैं। सबसे अहम वजह इंदौर से शारजाह के लिए चलने वाली एकमात्र अंतरराष्ट्रीय उड़ान का बंद होना है, जो पिछले दो महीनों से संचालित नहीं हो रही है। इससे इंटरनेशनल टूरिज्म पर सीधा असर पड़ा है।
इसके अलावा, युद्ध जैसे हालात के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिससे हवाई किराया कई रूट्स पर दोगुना तक पहुंच गया है। साथ ही, कुछ घरेलू उड़ानों के बंद होने से भी यात्रियों के विकल्प कम हुए हैं। अप्रैल में कुल 2,569 उड़ानों का संचालन हुआ, जो साल का सबसे निचला स्तर है।
ट्रेवल इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले महीनों में भी राहत की उम्मीद कम है। गर्मी की छुट्टियों का पीक सीजन भी इस बार पर्यटन के लिहाज से कमजोर पड़ता नजर आ रहा है, जिससे पूरे ट्रैवल सेक्टर पर दबाव बढ़ सकता है।







