मध्य प्रदेश की राजनीति एक बार फिर उबाल पर है… और इस बार सवाल सिर्फ राज्यसभा की सीट का नहीं, कांग्रेस की नीयत, नेतृत्व और सामाजिक न्याय के दावों का है। अप्रैल 2026 में राज्यसभा की दो सीटें खाली हो रही हैं। एक तरफ भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी, दूसरी तरफ कांग्रेस के दिग्विजय सिंह। लेकिन असली धमाका तब हुआ, जब दिग्विजय सिंह ने खुद ऐलान कर दिया “मैं अपनी राज्यसभा की सीट खाली कर रहा हूं।” अब सवाल ये नहीं है कि सीट खाली होगी… सवाल ये है कि कांग्रेस में खाली क्या हो चुका है,कुर्सी या राजनीतिक समझ?
कभी तीसरी बार राज्यसभा जाने की अटकलें, कभी आरएसएस और बीजेपी के संगठन कौशल की तारीफ… और फिर अचानक यू-टर्न! कांग्रेस के अंदरखाने में जो खिचड़ी पक रही थी, वो अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की उपेक्षा, दबाव की राजनीति और टिकट की खींचतान—सब कुछ अब नंगा हो चुका है। और इसी बीच अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार का पत्र… सीधा सवाल “राज्यसभा में SC वर्ग को कब भेजेंगे?” सवाल वाजिब है, लेकिन जवाब? दिग्विजय सिंह का साफ पल्ला झाड़ना “यह मेरे हाथ में नहीं है।” तो फिर किसके हाथ में है कांग्रेस का फैसला?
65 विधायकों वाली कांग्रेस, 230 सदस्यीय विधानसभा में पहले ही हाशिये पर है। एक सीट भेजने की स्थिति में है पार्टी, लेकिन उस एक सीट पर भी सामाजिक संतुलन की हिम्मत नहीं दिखा पा रही। पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने समर्थन जरूर किया, लेकिन समर्थन से पेट नहीं भरता, प्रतिनिधित्व चाहिए! कांग्रेस सालों से सामाजिक न्याय का ढोल पीटती है, लेकिन जब मौका आता है तो वही पुराना चेहरा, वही पुरानी राजनीति! बीजेपी 163 विधायकों के दम पर चुपचाप रणनीति बुन रही है… और कांग्रेस? कांग्रेस अभी भी तय नहीं कर पा रही कि राज्यसभा में चेहरा भेजना है या सिर्फ बयान। अब देखना ये है—क्या कांग्रेस इस बार इतिहास बदलेगी? या फिर एक और मौका, एक और सीट, और एक और भरोसा… यूं ही खाली छोड़ देगी?







