भोपाल की धरती पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन उस वक्त उग्र तेवर में बदल गया जब राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी मंच पर पहुंचे। भीड़ में गूंजते नारों के बीच एक ही संदेश साफ था “किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं होगा!”
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीधा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस ट्रेड डील का ढोल पीटा जा रहा है, उसका सबसे बड़ा नुकसान मध्य प्रदेश के किसानों को होने वाला है। गेहूं, मक्का, सोयाबीन, सरसों हर फसल पर संकट मंडरा रहा है। कपास के दाम 11 प्रतिशत गिर चुके हैं। सवाल सीधा है जब विदेश से सस्ता दूध आएगा तो यहां के पशुपालक क्या करेंगे? 15–20 रुपये में बिकेगा दूध? और फायदा किसे होगा अमेरिका के किसानों को? सिंघार ने तंज कसा, “आय दोगुनी करने की बात करते हैं, लेकिन किसकी आय? मध्य प्रदेश के किसान की या अमेरिका के किसान की?” मंच से संदेश साफ था यह सिर्फ राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि किसानों के हक की लड़ाई का ऐलान है।
मोदी–ट्रंप डील या भारत का सौदा? कांग्रेस का सीधा आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने तीखा आरोप लगाया कि यह समझौता भारत और अमेरिका के बीच नहीं, बल्कि नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुआ है। पटवारी ने कहा, “अगर यह डील सच में भारत-अमेरिका के हित में होती, तो भारत के किसानों का भविष्य दांव पर नहीं लगाया जाता। यह सौदा देशहित में नहीं, दोस्ती निभाने के लिए किया गया है।” सभा में मौजूद समर्थकों के बीच गुस्सा साफ दिखा। मंच से बार-बार यह दोहराया गया कि कांग्रेस वही पार्टी है जिसने किसानों का कर्ज माफ किया था, और आज भी किसान की आवाज बुलंद करने मैदान में खड़ी है। राहुल गांधी और खड़गे ने संकेत दिया कि यह लड़ाई लंबी होगी और सड़क से संसद तक लड़ी जाएगी। सवाल अब जनता के बीच है क्या किसान की कीमत पर कोई भी समझौता मंजूर है? भोपाल की इस रैली ने सियासत को गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और भड़कने वाला है।







