मध्यप्रदेश में राज्यपाल के पद को लेकर अब मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। राज्यपाल मंगुभाई पटेल का पांच साल का कार्यकाल 8 जुलाई 2026 को पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बाद अब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं हुई है। इसी को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी, जिस पर मंगलवार को सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।
याचिका जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के सेवानिवृत्त डॉ. एबी खान ने दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा ने अदालत के सामने संविधान के अनुच्छेद 153 का हवाला दिया। उनका कहना है कि प्रत्येक राज्य के लिए राज्यपाल का प्रावधान संविधान में किया गया है और राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष का होता है।
मंगुभाई पटेल ने 8 जुलाई 2021 को मध्यप्रदेश के राज्यपाल के रूप में पदभार संभाला था। उनका निर्धारित पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा होने के बाद भी नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं होने को लेकर यह याचिका दायर की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में मांग रखी गई है कि जब तक नए राज्यपाल की नियुक्ति नहीं होती, तब तक मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को राज्यपाल का प्रभार सौंपा जाए।
हालांकि, इस मामले में हाईकोर्ट क्या आदेश देता है, यह फैसला आने के बाद ही साफ होगा। मंगलवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित रख लिया है और अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि नए राज्यपाल की नियुक्ति तक मध्यप्रदेश में संवैधानिक व्यवस्था को लेकर हाईकोर्ट क्या रुख अपनाता है। फैसले के बाद इस मामले की तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।




