मध्य प्रदेश की सियासत और कारोबारी जगत में इन दिनों एक ऐसा मामला चर्चा में है, जिसने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला है कथित 930 करोड़ रुपये की ठगी, भोपाल के आठ क्लब-रेस्टोरेंट और डिप्टी सीएम के ओएसडी को एक करोड़ रुपये देने के दावे का। आखिर कौन है मोहित गोगिया, और इस पूरे मामले में क्या-क्या खुलासे सामने आए हैं?
जानकारी के मुताबिक, पंजाब की जेल में बंद मोहित गोगिया पर करीब 200 लोगों से 930 करोड़ रुपये की ठगी करने का आरोप है। इसी मामले में भोपाल के पनीर कारोबारी किशन मोदी से भी 13 करोड़ 50 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।
बताया जा रहा है कि किशन मोदी से प्राप्त रकम को भोपाल के क्लब और रेस्टोरेंट कारोबार में निवेश किया गया। भोपाल के आठ क्लबों में गोगिया के पैसे लगे होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, इस निवेश से जुड़े सभी पहलुओं और रकम के वास्तविक इस्तेमाल की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इस मामले ने उस वक्त राजनीतिक तूल पकड़ लिया, जब मोहित गोगिया ने कथित तौर पर मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी यानी ओएसडी दीपम रायचुरा को एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने का दावा किया।
इस दावे के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने दीपम रायचुरा को उनके पद से हटा दिया। हालांकि, पद से हटाए जाने को रिश्वत के आरोप की पुष्टि नहीं माना जा सकता। गोगिया के दावे और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच जरूरी है।
बताया जा रहा है कि आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा यानी ईओडब्ल्यू की एफआईआर में किशन मोदी से जुड़े लेन-देन का जिक्र है। पूछताछ के दौरान कुछ कारोबारियों, अधिकारियों और नेताओं के नाम सामने आने की भी खबर है। लेकिन किसी का नाम सामने आना अपने आप में अपराध साबित नहीं करता।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 13 करोड़ 50 लाख रुपये की कथित ठगी का पैसा आखिर किन-किन कारोबारों में लगाया गया? क्या भोपाल के क्लब-रेस्टोरेंट में निवेश की पूरी कड़ी सामने आएगी? और एक करोड़ रुपये की रिश्वत देने के दावे की जांच में क्या निष्कर्ष निकलेंगे?
फिलहाल, इस मामले में जांच के निष्कर्ष और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान बेहद अहम होंगे। आने वाले दिनों में यह मामला मध्य प्रदेश की राजनीति और कारोबारी जगत में और भी बड़े खुलासे कर सकता है।




