मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एक अहम सुनवाई के दौरान अदालत से तथ्य छिपाने के मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने वकील दिनेश सिंह चौहान पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए तीखी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि न्यायालय के सामने पूरी और सही जानकारी रखना वकील की जिम्मेदारी है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया।
पूरा मामला प्राथमिक शिक्षक भर्ती से जुड़ी याचिकाओं का है। सुनवाई के दौरान वकील दिनेश सिंह चौहान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश हुए। इसी दौरान दूसरे पक्ष के वकील ने अदालत को बताया कि इसी मुद्दे पर दायर एक समान याचिका को जबलपुर बेंच पहले ही 6 अप्रैल को खारिज कर चुकी है।
कोर्ट के सामने यह तथ्य आने के बाद खुलासा हुआ कि वकील चौहान ने इस महत्वपूर्ण आदेश की जानकारी छिपाकर इंदौर बेंच में 27 अप्रैल को अंतरिम राहत हासिल कर ली थी। इसे गंभीर मानते हुए हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की और वकील को तुरंत 50 हजार रुपए की राशि हाईकोर्ट विधिक सेवा समिति के सचिव के पास जमा करने के निर्देश दिए।
हाईकोर्ट के इस फैसले को न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखने के लिए एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।







