मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस ने इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के खिलाफ तीन दिनों के बहिष्कार का ऐलान किया है। पार्टी ने घोषणा की है कि इस अवधि में उसके कोई भी अधिकृत प्रवक्ता, नेता या प्रतिनिधि किसी भी टीवी डिबेट में हिस्सा नहीं लेंगे और न ही इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कोई आधिकारिक बाइट देंगे।
कांग्रेस का यह फैसला मुख्यमंत्री से जुड़े कथित उज्जैन जमीन खरीद मामले को लेकर लिया गया है। पार्टी का आरोप है कि इस मुद्दे को प्रदेश के अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक मीडिया संस्थानों ने न तो प्रमुखता से दिखाया और न ही इस पर गंभीर और निष्पक्ष बहस कराई। कांग्रेस का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस मामले से जुड़े दस्तावेज़ और दावे लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया जनता तक इस विषय को प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचा रहा।
प्रदेश कांग्रेस समिति के संगठन प्रभारी महासचिव डॉ. संजय कमले द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि जनहित और जवाबदेही से जुड़े इस महत्वपूर्ण मामले की अनदेखी की जा रही है। पार्टी का आरोप है कि जनता का ध्यान दूसरे मुद्दों की ओर मोड़ने की कोशिश हो रही है, जिससे वास्तविक सवाल पीछे छूट रहे हैं।
इसी के विरोध में कांग्रेस ने अगले तीन दिनों तक मौन सत्याग्रह करने का फैसला किया है। इस दौरान केवल अधिकृत प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएंगी, लेकिन टीवी चैनलों की बहसों में कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि शामिल नहीं होगा। साथ ही नेताओं और प्रवक्ताओं को व्यक्तिगत स्तर पर भी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को आधिकारिक बयान देने से मना किया गया है।
यह निर्देश प्रदेश के सभी वरिष्ठ नेताओं, विधायकों, प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों, मोर्चा संगठनों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचा दिया गया है।
अब इस राजनीतिक फैसले के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कांग्रेस का यह बहिष्कार इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर दबाव बनाने की रणनीति साबित होगा, या फिर इससे प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा होगा। इस पूरे घटनाक्रम पर सभी की नजर बनी हुई है।







