महाराष्ट्र के वाशिम जिले से न्याय व्यवस्था से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। करीब 15 साल पुराने हिरासत में मौत के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए नौ पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जे. पी. झापटे की अदालत ने तत्कालीन रिसोड थाना प्रभारी माधव धांडे समेत कुल नौ पुलिसकर्मियों को दोषी ठहराया और भारतीय दंड संहिता तथा दंड प्रक्रिया से संबंधित प्रावधानों के तहत सजा सुनाई।
यह मामला भेग्या पवार नाम के युवक की मौत से जुड़ा है। पुलिस ने उन्हें चोरी से जुड़े एक मामले में पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था, लेकिन हिरासत के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने आरोप लगाया कि युवक के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट और यातनाएं दी गईं, जिसके कारण उसकी जान चली गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच राज्य की अपराध जांच विभाग यानी CID को सौंपी गई। लंबी जांच, गवाहों और सबूतों के आधार पर अदालत ने नौ पुलिसकर्मियों को दोषी माना। दोषी ठहराए गए पुलिसकर्मियों में तत्कालीन थाना प्रभारी माधव धांडे के अलावा मदन पवार, शिवाजी खिल्लारी, पंजाब पाटकर, रमेश पवार, प्रकाश तराम, नागोराव खांडके, अशोक वैद्य और वसंत जाधव शामिल हैं।
करीब डेढ़ दशक तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले को हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक निर्णय माना जा रहा है। यह फैसला इस बात का भी संदेश देता है कि कानून के दायरे में हर व्यक्ति समान है और यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो किसी भी पद पर बैठे व्यक्ति को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
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