रात के अंधेरे में जंगल की सीमा पर कानून और अपराध आमने-सामने थे। अवैध कोयला उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई कर लौट रही वन विभाग की टीम को अंदाजा भी नहीं था कि आगे उनका सामना संगठित माफियाओं से होने वाला है। शहडोल जिले के सोहागपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बडखेरा के खितौली बीट में सोन नदी किनारे बुधवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया, जब कोल माफियाओं ने वन अमले पर अचानक हमला बोल दिया।
जानकारी के अनुसार शहडोल रेंजर राम नरेश विश्वकर्मा सहित कई वन कर्मियों को करीब 30 से अधिक लोगों की भीड़ ने घेर लिया। आरोप है कि माफियाओं ने न केवल रास्ता रोका बल्कि रेंजर और कर्मचारियों को बंधक बनाकर मारपीट भी की। बताया जा रहा है कि वन विभाग को लंबे समय से सोन नदी के किनारे अवैध उत्खनन और कोयला परिवहन की शिकायतें मिल रही थीं। इसी सूचना के आधार पर टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई की।
लेकिन कार्रवाई के बाद जब अमला वापस लौट रहा था, तभी पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने हमला कर दिया। सूत्रों के मुताबिक दो दिन पहले भी रेंजर के साथ बदतमीजी की गई थी और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई थी। इसके बावजूद वन विभाग ने अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने का प्रयास जारी रखा।
घटना के बाद वन विभाग ने सोहागपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की पहचान की जा रही है।
यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले ब्यौहारी क्षेत्र में रेत माफियाओं द्वारा कार्रवाई के दौरान एक पटवारी और एएसआई की ट्रैक्टर से कुचलकर हत्या कर दी गई थी। जिले में अवैध उत्खनन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों पर हमले की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिससे प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
वन मंडलाधिकारी दक्षिण श्रद्धा पंद्रे ने घटना को अत्यंत गंभीर बताते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं सोहागपुर थाना प्रभारी अरुण पांडेय ने पुष्टि की है कि वन विभाग की शिकायत पर जांच की जा रही है और दोषियों पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन अवैध उत्खनन के इस नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश लगा पाएगा, या फिर कार्रवाई करने वाले अधिकारी ही माफियाओं के निशाने पर बने रहेंगे।







