अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले भारतीय मूल के मतदाताओं को लेकर एक बड़ा दावा सामने आया है। खबर के मुताबिक, अमेरिकी वोटर लिस्ट से करीब 2 लाख भारतीय मूल के मतदाताओं के नाम काटे जाने की बात कही जा रही है। दावा है कि ये नाम उन 26 राज्यों में हटाए गए हैं, जहां रिपब्लिकन पार्टी की सरकार है। हालांकि, इन आंकड़ों और नाम हटाने के कारणों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
अमेरिका में 3 नवंबर 2026 को मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में मतदाता प्रतिनिधि सभा और सीनेट की सीटों के साथ-साथ कई राज्यों में स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित करेंगे। ऐसे में वोटर लिस्ट से नाम हटने का मुद्दा चुनावी बहस का अहम विषय बन सकता है।
अब बात भारतीय मूल के मतदाताओं की। अमेरिका में भारतीय मूल का समुदाय शिक्षा, कारोबार, तकनीक और राजनीति सहित कई क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में करीब 21 लाख भारतीय मूल के वोटर्स हैं। इनमें से बड़ी संख्या का मतदान चुनावी नतीजों और स्थानीय मुकाबलों पर असर डाल सकता है।
2024 के राष्ट्रपति चुनाव को लेकर दावा है कि लगभग 65 प्रतिशत भारतीय मूल के मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस का समर्थन किया था। हालांकि, यह आंकड़ा किस सर्वेक्षण या अध्ययन पर आधारित है, इसकी पुष्टि करना जरूरी है। पिछले चुनाव का रुझान भी इस बात की गारंटी नहीं है कि मतदाता आगामी चुनाव में उसी तरह मतदान करेंगे।
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर वास्तव में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, तो इसकी वजह क्या है? क्या ये नियमित मतदाता सूची की समीक्षा का हिस्सा है, या किसी खास समुदाय पर इसका असमान प्रभाव पड़ा है? इन सवालों के जवाब संबंधित राज्यों के आधिकारिक रिकॉर्ड और स्वतंत्र जांच से ही स्पष्ट होंगे।
फिलहाल, भारतीय मूल के मतदाताओं के नाम हटने का यह दावा अमेरिकी चुनावी प्रक्रिया, मतदाता अधिकारों और राजनीतिक पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज कर सकता है।
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