नई दिल्ली में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन इस बार भारत की कूटनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। 12 और 13 सितंबर को होने वाली इस बैठक में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, दोनों भारत पहुंचेंगे।
चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को शी जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि कर दी है। इससे पहले रूस भी पुतिन के भारत आने की पुष्टि कर चुका है। यानी BRICS के मंच पर दुनिया की दो बड़ी ताकतों के शीर्ष नेता एक साथ भारत में नजर आएंगे।
सबसे ज्यादा चर्चा शी जिनपिंग के दौरे को लेकर है। 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा होगा।
गलवान की उस घटना में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों के मारे जाने की बात स्वीकार की थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव बना रहा।
अब चार साल से ज्यादा समय बाद जिनपिंग का भारत आना दोनों देशों के संबंधों के लिए भी अहम संकेत माना जा रहा है। BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय मुलाकात होने की भी संभावना जताई जा रही है।
वहीं, पुतिन की मौजूदगी इस सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना देगी। BRICS में चीन और रूस समेत कुल 11 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि BRICS के मंच पर मोदी-जिनपिंग की संभावित मुलाकात में सीमा विवाद और द्विपक्षीय रिश्तों को लेकर क्या बातचीत होती है और क्या इससे भारत-चीन संबंधों में नई दिशा की शुरुआत हो सकती है।





