पहलगाम आतंकी हमले को लेकर BRICS देशों ने आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का बड़ा संदेश दिया है। रूस और चीन समेत BRICS के सदस्य देशों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की है। साझा बयान में साफ कहा गया है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ मिलकर कार्रवाई की जाएगी।
BRICS देशों ने आतंकवाद की जड़ पर प्रहार करने के लिए टेरर फंडिंग रोकने पर भी खास जोर दिया है। यानी आतंकियों तक पहुंचने वाले पैसे, संसाधनों और दूसरे मदद के रास्तों को बंद करने की दिशा में सदस्य देश आपसी सहयोग बढ़ाएंगे। साथ ही, उन लोगों और ठिकानों पर भी कार्रवाई की बात कही गई है, जो आतंकियों को सुरक्षित पनाह देते हैं या उनके नेटवर्क को मदद पहुंचाते हैं।
यह संदेश ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है। ईरान, सऊदी अरब और UAE जैसे देशों के कई क्षेत्रीय मुद्दों पर अलग-अलग रुख हैं। ऐसे माहौल में BRICS के साझा बयान पर सहमति बनना अपने आप में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम में भारत की भूमिका भी अहम रही। भारत ने लगातार बातचीत और कूटनीति के जरिए सदस्य देशों के बीच मतभेदों को कम करने और आतंकवाद के मुद्दे पर साझा सहमति बनाने की कोशिश की।
पहलगाम हमले की निंदा से लेकर टेरर फंडिंग रोकने और आतंकियों को पनाह देने वालों के खिलाफ कार्रवाई तक, BRICS का यह रुख आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने का संकेत देता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस साझा सहमति को जमीन पर कितनी मजबूती से लागू किया जाता है। अगर सदस्य देश आतंकियों की फंडिंग, सुरक्षित ठिकानों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई के लिए मिलकर काम करते हैं, तो आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को निश्चित तौर पर नई ताकत मिल सकती है।




