भागीरथपुरा कांड की सुनवाई के दौरान आज हाईकोर्ट में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब राज्य सरकार ने 28 में से 16 मौतों के दूषित पानी से होने की बात स्वीकार कर ली। इस स्वीकारोक्ति के बाद हाईकोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि अब यह जांच जरूरी है कि आखिर ये मौतें किन-किन कारणों से हुईं और इसकी विस्तृत पड़ताल की जाए।
कोर्ट ने दूषित पानी को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों को “अलार्मिंग स्थिति” करार दिया। महू समेत कई इलाकों से गंदे पानी की शिकायतें सामने आने पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना शासन का मूल कर्तव्य है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सुनवाई के दौरान डेथ ऑडिट पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जिन मौतों को दूषित पानी से नहीं जोड़ा गया है, उनका आधार क्या है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिए कि अगली सुनवाई में सभी मौतों से जुड़ी पूरी और स्पष्ट जानकारी पेश की जाए।
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से मृतकों के परिजनों को दिए जाने वाले मुआवजे की राशि बढ़ाने की मांग भी उठाई गई। कोर्ट ने इस मांग को रिकॉर्ड में लेते हुए मामले की अगली सुनवाई में सभी पहलुओं पर विस्तार से जवाब देने को कहा है।
अब सबकी निगाहें अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि जिम्मेदारी किसकी है और पीड़ित परिवारों को इंसाफ कितनी जल्दी मिलता है।







