नंदीग्राम उपचुनाव से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं और उनके खिलाफ कई पुराने आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसी बीच कलकत्ता हाईकोर्ट में उनकी चुनाव लड़ने की स्थिति को लेकर सुनवाई हुई।
मामले की सुनवाई जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की अदालत में हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने राज्य सरकार के वकील से कहा कि अगर मिलन प्रधान को जमानत मिलती है, तो उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति दी जानी चाहिए। यानी कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत मिलने की स्थिति में उनकी उम्मीदवारी के रास्ते में सिर्फ जेल में होने की वजह से रुकावट नहीं होनी चाहिए।
मिलन प्रधान के खिलाफ कुल 11 मामले बताए जा रहे हैं। इनमें से कई मामले 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने मामले हैं। उन्हें अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार किया गया है और फिलहाल वे न्यायिक हिरासत में हैं।
19 सितंबर को हल्दिया सब-डिविजनल कोर्ट ने चार मामलों में उन्हें 3 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा था। इसके बाद 21 सितंबर को कांथी कोर्ट ने करीब दो दशक पुराने आर्म्स एक्ट के एक मामले में उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
नंदीग्राम में उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है, जबकि चुनाव प्रचार 4 अक्टूबर को समाप्त होगा। ऐसे में मिलन प्रधान की जमानत और आगे की कानूनी कार्यवाही उनके चुनाव प्रचार में शामिल होने के लिहाज से महत्वपूर्ण बनी हुई है।
अब सबकी नजर हाईकोर्ट की आगे की कार्यवाही और मिलन प्रधान को मिलने वाली संभावित कानूनी राहत पर है।




