मध्यप्रदेश के सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नकली शराब के पूरे नेटवर्क की परतें खुलती जा रही हैं। पुलिस जांच में अब अंतरराज्यीय कनेक्शन सामने आया है, जिसके तार दिल्ली, ग्वालियर और मुरैना तक जुड़े बताए जा रहे हैं।
जांच के मुताबिक, नकली शराब तैयार करने के लिए दिल्ली से औद्योगिक स्पिरिट और दूसरे केमिकल मंगाए गए, जबकि ग्वालियर से खाली बोतलें, रैपर और पैकेजिंग का सामान पहुंचाया गया। इसके बाद सागर के ततरवारा इलाके में कथित तौर पर शराब का घोल तैयार कर बोतलों में भरा जाता था। बोतलों पर ब्रांडेड शराब जैसे नाम, रेपर और QR कोड लगाए जाते थे और फिर पेटियों के जरिए अलग-अलग इलाकों में सप्लाई की जाती थी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि नकली शराब तैयार करने में शामिल बताए जा रहे दिनेश शिवहरे ने शराब का टेस्ट खुद किया था। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। उसके साथी देवेंद्र जाटव की आंखों की रोशनी प्रभावित होने की जानकारी भी जांच में सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क में कई लोगों की भूमिका सामने आई है और बड़ी संख्या में आरोपियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। ग्वालियर से हजारों खाली बोतलें, बोतल बनाने और सील करने के उपकरण भी बरामद किए गए हैं।
इस मामले की गंभीरता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि जहरीली शराब के सेवन से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई और कई लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित होने की खबर सामने आई। शुरुआती जांच में मिथाइल अल्कोहल से जुड़े संकेत भी मिले थे।
अब पुलिस की जांच का फोकस इस बात पर है कि इस नेटवर्क का पूरा संचालन कौन कर रहा था, केमिकल और पैकेजिंग की सप्लाई कहां से हुई और तैयार शराब किन-किन इलाकों तक पहुंचाई गई। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, इस जहरीले कारोबार से जुड़े नए नाम और नए ठिकाने सामने आने की संभावना है।




