देश के कई राज्यों में मौसम का मिजाज लगातार बिगड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भारी बारिश के चलते कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मध्य प्रदेश में नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। नदी किनारे बसे इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है और लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।
उत्तर प्रदेश में भी बारिश ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रदेश के करीब 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। गंगा, घाघरा, शारदा, टोंस, सोन और मंदाकिनी नदी का जलस्तर खतरे के निशान को पार कर चुका है। नदियों के उफान पर आने से निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। कई जगह जलभराव और आवागमन प्रभावित होने की स्थिति सामने आ रही है।
हिमाचल प्रदेश में इस मानसून के दौरान बारिश, बाढ़, लैंडस्लाइड और अन्य घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 219 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। इनमें सबसे ज्यादा 131 मौतें सड़क हादसों में हुई हैं। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण पहाड़ी इलाकों में खतरा बना हुआ है।
वहीं, राजस्थान में मौसम ने बिल्कुल अलग तस्वीर दिखाई। प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में पिछले कुछ दिनों से बारिश नहीं होने के कारण गर्मी फिर तेज हो गई है। गुरुवार को श्रीगंगानगर प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 40.1 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया।
यानी एक तरफ मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में नदियां खतरे के निशान को पार कर रही हैं, हिमाचल में बारिश और लैंडस्लाइड जानलेवा साबित हो रहे हैं, तो दूसरी तरफ राजस्थान में गर्मी का असर फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। देशभर में मौसम के ये अलग-अलग रंग प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।







