20 जुलाई को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन अब नए कानूनी विवाद में घिरता नजर आ रहा है। पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी की अधिवक्ता रिंकी चटर्जी सिंह ने CJP के आयोजकों सौरव दास, अभिजीत दीपके और अन्य लोगों के खिलाफ जीरो FIR दर्ज किए जाने की शिकायत दी है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान 12 साल की एक बच्ची को मंच और आंदोलन का हिस्सा बनाया गया, जिसे शिकायतकर्ता ने कानून के विरुद्ध बताया है। इसी आधार पर उन्होंने आयोजकों के खिलाफ POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 153 के तहत कार्रवाई की मांग की है।
इतना ही नहीं, शिकायत में प्रदर्शन की फंडिंग की भी विस्तृत जांच कराने की मांग उठाई गई है। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि आंदोलन के लिए आर्थिक सहयोग कहां से आया और इसके पीछे किन लोगों की भूमिका रही। साथ ही यह आरोप भी लगाया गया है कि इस पूरे घटनाक्रम के जरिए सरकार को अस्थिर करने की साजिश की जा रही है।
हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित आयोजकों की ओर से सार्वजनिक रूप से क्या जवाब दिया गया है या जांच एजेंसियों ने क्या निष्कर्ष निकाला है, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। इसलिए मामले की सच्चाई जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि पुलिस शिकायत पर आगे क्या कार्रवाई करती है, क्या जीरो FIR दर्ज होती है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। यह मामला केवल एक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
फिलहाल, इस पूरे मामले में सभी पक्षों की प्रतिक्रिया और जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।







