लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद सोनम वांगचुक ने अपनी 26 दिन लंबी भूख हड़ताल को लेकर उठ रहे सवालों का पहली बार खुलकर जवाब दिया है। शुक्रवार रात जारी किए गए वीडियो संदेश में वांगचुक ने भावुक अंदाज में कहा कि 26 दिन तक भूखे रहने के बाद उनका 11 किलो वजन कम हो गया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अब उन्हें यह साबित करने के लिए भी कैरेक्टर सर्टिफिकेट लेना पड़ेगा कि उनका अनशन पूरी तरह ईमानदार और पवित्र था।
वांगचुक ने उन आरोपों को सिरे से खारिज किया जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने सरकार के साथ किसी तरह की डील के बाद अपना अनशन समाप्त किया। उन्होंने कहा कि अगर समझौता ही करना होता तो वह 26 दिन तक भूखे रहने का कठिन फैसला कभी नहीं लेते। उनके मुताबिक, इतने लंबे संघर्ष का मकसद केवल लद्दाख के लोगों की आवाज़ को देश के सामने रखना था, न कि किसी राजनीतिक सौदेबाजी का हिस्सा बनना।
इधर मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि वांगचुक की भूख हड़ताल खत्म कराने के पीछे कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा की अहम भूमिका रही। बताया जा रहा है कि सरकार और वांगचुक के बीच करीब तीन दिनों तक बैक-चैनल बातचीत चली, जिसमें कई स्तरों पर संवाद हुआ और आखिरकार सहमति का रास्ता निकला। रिपोर्ट्स के अनुसार, विवेक तन्खा पहले भी वांगचुक से जुड़े एक मामले में सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से पैरवी कर चुके हैं।
हालांकि इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों में नई बहस छिड़ गई है। एक ओर वांगचुक अपने आंदोलन की नीयत पर उठे सवालों का जवाब दे रहे हैं, तो दूसरी ओर उनकी भूख हड़ताल समाप्त होने के पीछे हुई बातचीत और मध्यस्थता को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार और वांगचुक के बीच हुई बातचीत का आगे क्या परिणाम निकलता है और लद्दाख से जुड़ी मांगों पर क्या फैसला होता है।







