करीब तीन साल तक सुर्खियों में रहे ग्वालियर के बहुचर्चित अक्षया यादव हत्याकांड में आखिरकार अदालत का बड़ा फैसला सामने आ गया है। जिला एवं सत्र न्यायालय ने चारों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाते हुए साफ कर दिया कि कानून की नजर से कोई अपराधी बच नहीं सकता।
इस हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जांच में खुलासा हुआ कि अक्षया यादव असल निशाना नहीं थीं। आरोपियों का टारगेट उनकी सहेली सोनाक्षी शर्मा थी, जिससे मुख्य आरोपी एकतरफा प्यार करता था। इसी जुनून ने एक मासूम छात्रा की जान ले ली।
घटना 10 जुलाई 2023 की है। रात करीब आठ बजे अक्षया और सोनाक्षी कोचिंग से लौटते समय जन्मदिन की खरीदारी कर स्कूटी से घर जा रही थीं। जैसे ही वे बेटी बचाओ चौराहे के पास पहुंचीं, बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें घेर लिया और ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं। गोली अक्षया के हाथ और सीने में लगी, जबकि सोनाक्षी बाल-बाल बच गईं। अस्पताल पहुंचने से पहले ही अक्षया की जिंदगी की डोर टूट गई।
मामले की जांच में पुलिस ने सिर्फ प्रत्यक्ष सबूतों पर भरोसा नहीं किया, बल्कि तकनीकी जांच को सबसे बड़ा हथियार बनाया। आरोपियों की वॉट्सऐप चैट, कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR, घटनास्थल से जुड़े डिजिटल साक्ष्य, बरामद हथियार और 26 गवाहों की गवाही ने अदालत के सामने पूरी साजिश की तस्वीर साफ कर दी। यही सबूत चारों आरोपियों के खिलाफ मजबूत आधार बने।
इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे ग्वालियर में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा था। सड़कों पर प्रदर्शन हुए, दोषियों की गिरफ्तारी और कड़ी सजा की मांग उठी। अब अदालत के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह मामला एक बार फिर साबित करता है कि एकतरफा प्यार जब जुनून और हिंसा में बदल जाता है, तो उसकी कीमत किसी बेगुनाह को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। वहीं, आधुनिक तकनीकी जांच और मजबूत साक्ष्य अपराधियों को कानून के शिकंजे से बचने का कोई मौका नहीं देते।







