मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल तेलंगाना के भद्राचलम क्षेत्र में अटका हुआ है, जिसके कारण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में इसकी एंट्री में देरी हो रही है। अब प्रदेश में मानसून 21 से 23 जून के बीच पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
मानसून की इस लेटलतीफी का सीधा असर किसानों की तैयारियों पर पड़ रहा है। जून महीने में अब तक सामान्य से करीब 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी खरीफ फसलों की बोवनी के लिए कम से कम 100 मिलीमीटर यानी लगभग 4 इंच बारिश जरूरी होती है।
वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में बोवनी न करें और पर्याप्त वर्षा होने का इंतजार करें। साथ ही बीजों का उपचार कर उन्हें तैयार रखें, ताकि मानसून सक्रिय होते ही समय पर बुवाई की जा सके। फिलहाल पूरे प्रदेश की निगाहें आसमान पर टिकी हैं और किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं।







