संसद का मानसून सत्र खत्म हुए करीब दो महीने होने वाले हैं, लेकिन एक असामान्य स्थिति अब भी बनी हुई है। 13 अगस्त 2026 को लोकसभा और राज्यसभा की बैठकें अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई थीं। लोकसभा के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी 13 अगस्त को सदन के अनिश्चितकाल के लिए स्थगित होने की पुष्टि होती है।
लेकिन इसके बाद अब तक दोनों सदनों का औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। यानी संसद की बैठकें नहीं हो रही हैं, लेकिन मानसून सत्र को आधिकारिक तौर पर समाप्त करने की अधिसूचना भी जारी नहीं हुई है।
मंगलवार तक दोनों सदन करीब 54 दिन से इसी स्थिति में हैं। दावा है कि दोनों सदनों के एक साथ बिना सत्रावसान के रहने की यह सबसे लंबी अवधि है, जिसने 37 साल पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छोड़ दिया है।
इससे पहले साल 1989 में ऐसी स्थिति बनी थी। उस समय दोनों सदन 18 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुए थे और बिना सत्रावसान के 11 अक्टूबर को उसी सत्र की बैठक दोबारा शुरू हुई थी। संसद के आधिकारिक दस्तावेजों में भी 1989 के उस सत्र के बिना सत्रावसान के दोबारा बुलाए जाने का उल्लेख मिलता है।
अब सवाल यह है कि इस बार सत्रावसान में इतनी देरी क्यों हो रही है और क्या संसद की दोबारा बैठक बुलाए जाने की तैयारी है?
दरअसल, अगस्त में मानसून सत्र समाप्त होने के बाद ही संभावित विशेष सत्र को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई थीं। 28 अगस्त को संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी यह संभावना पूरी तरह बंद नहीं की थी कि संसद की एक और बैठक हो सकती है, क्योंकि उस समय तक मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं हुआ था।
हालांकि, विशेष सत्र को लेकर अंतिम फैसला और उसकी तारीख सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से घोषित किए जाने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल संसद की कार्यवाही भले ही रुकी हुई है, लेकिन मानसून सत्र का औपचारिक रूप से समाप्त न होना इसे राजनीतिक और संसदीय दोनों दृष्टि से खास बना रहा है। अब नजर इस बात पर है कि अगला कदम सत्रावसान होगा या फिर इसी सत्र की बैठक दोबारा बुलाई जाएगी।





