दतिया की शांत सुबह को जिसने भी देखा, उसने शायद नहीं सोचा होगा कि खेतों की पगडंडियों के पास इतनी दरिंदगी बिखरी मिलेगी। 19 फरवरी की सुबह चिरुला थाना इलाके के फुलरा गांव के पास, ग्वालियर-झांसी हाईवे से सटी सड़क किनारे एक लाश पड़ी थी। हरी जैकेट पहने, उल्टा पड़ा हुआ शरीर… गला इतनी बेरहमी से कटा कि देखने वालों की रूह कांप जाए।
शाम तक पहचान हुई ये कोई अंजान नहीं था। ये था 39 वर्षीय कल्याण राणा, ग्वालियर का रहने वाला। पोस्टमॉर्टम ने साफ कर दिया ये हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या थी। पहले गला दबाया गया, फिर कटर मशीन से गर्दन काटी गई। सवाल सीधा था इतनी नफरत? इतनी बर्बरता? आखिर क्यों?
जवाब ने सबको झकझोर दिया। सरकारी हॉस्टल की अधीक्षिका… वही पत्नी, जिसने 9 साल पहले अपने से 6 साल छोटे युवक से लव मैरिज की थी। प्यार की कसमें खाने वाली पत्नी ने ही अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की सांसें छीन लीं। कार में बैठकर पहले गला दबाया… और फिर प्रेमी ने मशीन से गला काट दिया। ये गुस्सा नहीं था, ये ठंडी साजिश थी।
45 मिनट की भूख ने खोल दी हत्या की पोल
हत्या के बाद दोनों भागे नहीं। घबराए नहीं। बल्कि हाईवे के एक ढाबे पर रुके। खाना ऑर्डर किया। बैठकर करीब 45 मिनट तक खाते रहे। जैसे कुछ हुआ ही न हो। जैसे कार की पिछली सीट पर इंसान नहीं, सामान पड़ा हो।
पुलिस ने जब मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और हाईवे के ढाबों की पड़ताल शुरू की, तो सच सामने आने लगा। कार की मूवमेंट ट्रेस हुई। ढाबे के कैमरे में दोनों साफ दिखे घबराहट नहीं, सामान्य चेहरा… लेकिन वक्त गवाही दे चुका था। कॉल डिटेल्स ने पत्नी और प्रेमी की लगातार बातचीत उजागर कर दी। शक यकीन में बदला, और यकीन हथकड़ियों में।
बताया जा रहा है कि वैवाहिक संबंधों में दरार थी। अधीक्षिका का पुराने प्रेमी से रिश्ता फिर गहराया। पति रास्ते का कांटा बन गया। और उस कांटे को हटाने के लिए रची गई ये खौफनाक साजिश। प्यार के नाम पर शादी… फिर उसी प्यार के नाम पर हत्या। सवाल यही है क्या यही है आज का प्रेम? जहां रिश्ते जिम्मेदारी नहीं, मौका बन गए हैं? दतिया की ये कहानी सिर्फ एक मर्डर नहीं, भरोसे की लाश है। सलाखों के पीछे अब दोनों आरोपी हैं… लेकिन जिस रिश्ते का गला कटा, उसकी सजा समाज कब तक भुगतेगा?







